तलाक या डाइवोर्स

प्रशन:- वकील साहब तलाक या डाइवोर्स किस आधार पर होता है ये केस कैसे फाइल करे व कैसे इसे जीते व कैसे सामने वाली पार्टी को कैसे हराए

उत्तर:- तलाक या डाइवोर्स ऐसी विय्र्ता है जो की समाज में बडती ही जा रही है आज हम बात करते है हिन्दू और मुस्लिम समाज में तलाक व इनमे कैसे किस फाइल करे व लडे | पहले हिन्दू विधि की बात करते है |

हिन्दू समाज में तलाक या डाइवोर्स

हिन्दू विधि में विवाह विधि संशोधन अधिनियम 1976 के लागू होने के बाद महिलाओं की स्थिति मज़बूत हुई है और पति द्वारा बहुविवाह व पति द्वारा बलात्कार,गुदा मैथुन अथवा पशुगमन दो और आधार महिलाओं को प्राप्त हो गए हैं जबकि इससे पूर्व 11 आधार पति-पत्नी दोनों को प्राप्त थे | हिन्दू समाज में तलाक या डाइवोर्स के आधार निमंलिखित हैं:-

  1. जारता
  2. क्रूरता
  3. अभित्याग
  4. धर्म-परिवर्तन
  5. मस्तिष्क विकृत्त्ता
  6. कोढ़
  7. रतिजन्य रोग
  8. संसार परित्याग
  9. प्रकल्पित मृत्यु
  10. न्यायिक प्रथक्करण
  11. दांपत्य अधिकारों के पुनर्स्थापन की आज्ञप्ति का पालन न करना
  12. बहुविवाह
  13. बलात्कारया रेप ,गुदा मैथुन अथवा पशुगमन

इस तरह अब हिन्दू महिलाओं को तलाक या डाइवोर्स के 13 अधिकार प्राप्त है |

हिन्दू महिला किस धारा में तलाक का केस फाइल करे :- हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13 में divorce का केस फाइल हो सकता है |

पति-पत्नी की मर्जी से तलाक या डाइवोर्स:- पति-पत्नी चाहे तो अपनी मर्जी से भी तलाक ले सकते है | एस प्रकार के तलाक को कोर्ट में एप्लीकेशन लगा कर लिया जाता है इन केसों में दो बार एप्लीकेशन लगती है और केस दो तारीखों में खत्म हो जाता है

तलाक या डाइवोर्स के केस में पत्नी का खर्चा :- हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 24 में पत्नी पति से खर्चा ले सकती है पर यह खर्चा सिर्फ केस के चलने तक ही रहता है | इसके बाद खत्म हो जाता है । लेकिन कोर्ट को लास्ट में केस में डिग्री पास करते समय अगर लगे कि पति या पत्नी को permanant maintenance मिलना चाहिये तो कोर्ट इस एक्ट की धारा 25 के तहत किसी के लिए भी ऐसा आदेश दे सकती है । ऐसा ही प्रोविजन डोमेस्टिक वोइलैन्स एक्ट/घरेलू हिंसा अधिनियम में भी है।

वैसे पति या पत्नी permanant maintenance /खर्चे के लिए सीधे धारा 125 cr.p.c. में केस फ़ाइल करे तो ज्यादा अच्छा है, इसमे मिलने के ज्यादा चान्सेस है क्योकि ये स्पेशल इसी के लिए है।

मुस्लिम महिलाओ में तलाक या डाइवोर्स

अगर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं.पहले मुस्लिम महिलाओं को तलाक के केवल दो अधिकार प्राप्त थे 1-पति की नपुन्संकता, 2-पर-पुरुष के साथ गमन (चरित्रहीनता) का आरोप

किन्तु न्यायिक विवाह-विच्छेद [मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम 1939 ]द्वारा मुस्लिम महिलाओं को आधार प्राप्त हो गए हैं:-

  1. पति की अनुपस्थिति,
  2. पत्नी के भरण-पोषण में असफलता,
  3. पति को सात साल के कारावास की सजा,
  4. दांपत्य दायित्वों के पालन में असफलता,
  5. पति की नपुन्संकता,
  6. पति का पागलपन,
  7. पत्नी द्वारा विवाह की अस्वीकृति[यदि विवाह के समय लड़की 15 वर्ष से कम उम्र की हो तो वह 18 वर्ष की होने से पूर्व विवाह को अस्वीकृत कर सकती है],
  8. पति की निर्दयता,
  9. मुस्लिम विधि के अंतर्गत विवाह विच्छेद के अन्य आधार,

(वैसे अभी तीन तलाक के कारण इसका मुद्दे के कारण नया विधेयक आना है उसके आने पर विस्तार से लिखूंगा |)

तलाक या डाइवोर्स का केस कैसे फाइल करे :- (1) केस फाइल करने के लिए सबसे पहले जरूरी बात है यह है की हम जिस आधार पर केस फाइल कर हरे है हमारे पास उसका सबूत भी होना चाहिए जैसे हम मार पिटाई का आरोप लगाते है तो उस के लिए डॉक्टर का मेडिकल भी होना चाहिए की उस वक्त हमे चोट लगी थी |

(2) केस में जो भी इल्जाम लगाये जाये वो एक ही सीरियल में होने चाहिए जैसे की सबसे पहले क्या हुआ तथा इसके बाद ये हुआ तथा उसके बाद वह और ये सभी इल्जाम अगर तारीख, महिना, या साल के साथ लिखे हुए हो तो बहुत अच्छा है | वरना आप केस हार सकते है | क्योकि केस जितने के लिए उस समय का कोर्ट को ज्ञात होना जरूरी होता है |

(3) केस कम शब्दों में पर साफ व स्पष्ट होना चाहिए | केस में बाते ज्यादा बड़ा चड़ा कर नही लिखे क्योकि उन्हें बाद में भूलने आ अंदेशा होता है |

(4) इन केसों के लिए में ये ही कहूँगा की आप स्वय ना फाइल करके अपने वकील साहब से ही फाइल करवाये |

अपने केस को कैसे साबित करे व जीते :- (1)पति पत्नी की लड़ाई एक घर या कमरे में ही होती है ऐसे में बाकी सभी लोग कोर्ट में पार्टी भी बने होते है तो सवाल ये उठता है की हम अपना केस किस आधार पर साबित करे व किसे गवाह बनाये | आप अपने केस को रिश्तेदारों या पड़ोसियों की गवाही से भी मजबूत करके जीत सकते है पर ऐसे केसों में अडोस-पडोस के लोग गवाही देने से कतराते है तो रिश्तेदार अपना हाथ पीछे खीचते है तो अगर ये लोग गवाह न बने तो कोई बात नही पर अगर आप को लगे की कोई आप के खिलाफ जा सकता है तो उस को भी अपने केस में पार्टी या फॉर्मर पार्टी बना सकते है | इससे वो व्यक्ति आप का केस अपनी गवाही से कमजोर नही कर पायेगा (फॉर्मर पार्टी वे लोग होते है जिनका केस में नाम तो होता है पर उनको कोर्ट की तरफ से समन इशू नही होता है)

(2) आपको अपना केस सिर्फ कहि गयी बातो को सच साबित करके जितना पड़ता है जैसे की पहले बताया की अगर आप कहते हो की 1 दिसम्बर को आपको पिटा था तो पिटाई का सबूत होना चाहिए | इसी प्रकार किसी दिन बड़ा झगड़ा हुआ था तो उस दिन की डेट लिखी होनी चाहिए |

(3) आप मोबाइल रिकॉर्डिंग, ऑडियो या विडियो का सहारा ले सकते हो पर इसके लिए वह उसी डिवाइज में ही save हो |

(4) आप detective एजेंसी का सहारा भी ले सकते है तथा सबूत इकट्ठे कर सकते हो पर सबूत ऐसे हो की जो की कोर्ट में ACCEPTABLE हो | वैसे अभी तक detective agency की मान्यता का मामला असमंजस में ही है | इसके लिए अभी कोई स्टिक कानून नही है |

(5) आप अपने केस का आधार मजबूत करने के लिए जल्द से जल्द अपने वकील साहब की मदद ले | तथा कई लोगो की आदत होती है की वे अपने वकील साहब पर विश्वास नही करते है व बार- बार नये वकील साहब बदलते रहते है इसलिए अपने वकील साहब को बार-बार ना बदले| इससे ये होगा की आप का केस मजबूत होने के बावजूद भी आप केस हार जायेंगे | क्योकि केस को वकील साहब की बातो व तथ्यों के आधार पर ही नही लड़ते है हम लोग लोगो के स्वभाव व बुद्धि के स्तर के आधार पर भी दुसरे को दबाते है और अपना केस जीतते है इसके लिए जरूरी होता है की अगर आपके के वकील साहब पुराने है तो वे सभी apposite पार्टियों को उनकी बुद्धि व स्वभाव को अच्छी तरह जानते होंगे व उनको गवाही के समय बातो में उलझा भी सकते है इसके अलावा इन केसों में इतनी बाते होती है की आप नये वकील साहब से याद करके बता भी नही सकते है | काफी लोग सिर्फ इस वजह से भी मजबूत केस होने के बावजूद केस हार जाते है |

विरोधी पार्टी को कैसे हराए :- आप गवाही के समय बातो को गुमा के पूछ कर हरा सकते हो इस पर में ज्यादा नही लिखूंगा क्योकि हर व्यक्ति का केस व उसके आधार अलग होते है टोपिक बहुत बड़ा हो जायेगा वैसे भी ये काम आपके वकील साहब का होता है और वे अपना केस अच्छी तरह लड़ना जानते है |

चेतावनी :- केस बनाते या लड़ते समय आप के वकील साहब कई बातो को छुपाते है कई बातो को बड़ा-चडा कर लिखते है ऐसी बातो पर यहा चर्चा करना शोभा भी देगा और बहुत बड़ा टॉपिक भी हो जायेगा वैसे भी हर व्यक्ति का केस अलग होता है तो ऐसे में इस पर कोई विचार प्रकट नही कर रहा हु ये आप के वकील साहब ज्यादा अच्छा जानते है |

(भगवान करे सभी जोड़े बिना विवाद के सुख पुर्वक रहे विवाह विच्छेद की नोबत नही आये)

जय हिन्द

द्वारा

अधिवक्ता धीरज गौतम

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