पैरोल और इसके नियम

प्रशन : वकील साहब ये पैरोल क्या होती है पैरोल और इसके नियम व शर्ते क्या किस आधार पर मिलती उनके न मानने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ क्या सख्ती या कानूनी कार्यवाही हो सकती है

उत्तर :- पैरोल क्या है, पैरोल का अर्थ है किसी अपराधी द्वारा अपनी सजा का एक बड़ा भाग काटने के बाद, अच्छे आचरण की वजह उसे जेल से कुछ समय के लिए मुक्त किया जाना। यह समय एक निश्चित अवधि के लिए होता है जिसे कोर्ट में अप्लिकेसन दे कर इसकी अवधि को आगे और लम्बा भी किया जा सकता है पैरोल किसी भी तरह के अपराधी को मिल सकती है अगर कोर्ट में केस चल रहा है तो सिर्फ वह कोर्ट या अपिल करने पर उपर की कोर्ट ही पैरोल दे सकती है लेकिन अगर अभियुकत को सजा मिल चुकि है है तो प्रशासन व जेल अध्यछ | पैरोल मिलन जितना कठिन है उससे ज्यादा कठिन है पैरोल और इसके नियम व शर्तो का पालन करना |

पैरोल और इसके नियम

पैरोल और इसके नियम

पैरोल मिलने का आधार :-

पैरोल और इसके मिलने के कुछ नियम व आधार होते है, हीरालाल बनाम बिहार राज्य(1977) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबी अवधि के कैदियों को अस्थायी पैरोल पर छोड़ा जाना चाहिए। अस्थायी पैरोल का अर्थ है कुछ समय के लिए व्यक्ति को जेल से छोड़ देना और पैरोल का समय समाप्त होते ही वापस जेल भेज देना।

  1. अपराधी अपने परिवार व रिश्तेदारों के किसी भी शोक व उल्लास में शामिल होने के लिए पैरोल ले सकता है |
  2. अपराधी अपने परिवार में कोई मुसीबत आये जैसे की कोई बीमार हो और उसे देखने वाला कोई नही होतो वह उसकी देखभाल के लिए पैरोल ले सकता है |
  3. अपराधी अपने परिवार के पालन पोषण के लिए भी पैरोल ले सकता है |
  4. अपराधी अपने बैंक अकाउंट के कार्यो व किसी प्रॉपर्टी को बेचने, ट्रान्सफर करने व will करने के लिए भी पैरोल ले सकता है |
  5. अपराधी अपने किसी सरकारी कार्य को करने के लिए भी पैरोल ले सकता है |
  6. अपराधी अपने किसी परवारिक व रिश्तेदारी में कोई सरकारी कारवाही के लिए भी पैरोल ले सकता है |
  7. अपराधी व अपराधी की पत्नी दोनों की इच्छा से, अगर उनकी कोई संतान नहीं है तो संतान उत्पत्ति के लिए भी पैरोल ली जा सकती है | वैसे ऐसी परोल सजायाप्ता कैदी को ही मिलती है इसमे बोर्ड फैसला करता है | जिसमे जेल अध्यछ व प्रशासन की भूमिका होती है |

पैरोल साल में कितनी बार मिलती है

  • अगर कोर्ट में केस चल रहा है तो जज अपनी मर्जी से कितनी बार भी अपराधी को पैरोल दे सकता है |
  • मगर जेल में बंद सजायाफ्ता कैदी को साल में दो बार ही पैरोल मिलती है। लेकिन स्तिथि व जरुरत के हिसाब से अपराधी को दो बार से भी ज्यादा बार पैरोल दी जा सकती | ताकि वह अपने परिवार में किसी समारोह, दुख या खुशी में शरीक हो सके।
  • सामान्यत: एक साल में परोल देने का समय किसी कैदी के लिए 4 माह का होता है। जबकि कृषि से संबंधित कैदी के लिए यह समय 6 सप्ताह तक होता है |
  • वैसे अपने एक आर्डर में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कैदी का आचरण जेल में अच्छा रहता है तो उसे बिना किसी रीज़न के वर्ष में दो सप्ताह के लिए पैरोल पर छोड़ देना चाहिए। ताकि वह अपने परिवार व समाज के जुडा रहे व उसका मानसिक संतुलन भी बना रहे | इससे एक लाभ यह भी मिलने की समभावना होती है की कैदी में जीने की व परिवार के पास जाने की इच्छा ज्यादा जाग्रत हो जाती है जिससे की वो अपना व्यवहार सामान्य बनाये रखता है व परिवार व समाज की चाह में दुबारा अपराध करने से भी तोबा कर सकता है |

पैरोल और इसके नियम व शर्ते

पैरोल और इसके नियम व शर्तो का पालन बहुत ही जरूरी है पैरोल पर छूटे व्यक्ति पर निम्नलिखित शर्तें लागु है |

  1. पैरोल और इसके नियम के अनुसार अपराधी नशा नहीं करेगा |
  2. पैरोल और इसके नियम के अनुसार अपराधी शराब के अड्डों पर नहीं जायेगा
  3. अपराधी शिकायत करता को किसी भी प्रकार की कोई हानी पहुचने की न तो चेष्टा करेगा न ही उसे व किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कोई षड्यंत्र रचेगा|
  4. अपराधी हथियार नहीं रखेगा
  5. अपराधी शिकार नहीं करेगा
  6. अपराधी अच्छे नागरिक की तरह जीवन बिताएगा
  7. अपराधी कानून का पालन करेगा
  8. अपराधी अन्य अपराधियों से नही मिलेगा उनको को पत्र नहीं लिखेगा व उनसे किसी भी प्रकार से कोई सम्बन्ध नही रखेगा |,
  9. अपराधी जुआ नहीं खेलेगा |
  10. अपराधी देर रात तक बाहर नहीं घूमेगा |
  11. अपराधी वेश्याओं के पास नहीं जायेगा |
  12. अपराधी अपने बताये हुए किसी निश्चित क्षेत्र में ही रहेगा, उस क्षेत्र को छोड़ क्र किसी भी हालत में बहार नही जायेगा |
  13. अपराधी अपने पैरोल में मांगे हुए कार्य को करने के अलावा सूर्य अस्त होने के बाद बाहर नही जायेगा | सिर्फ घर पर ही रहेगा |
  14. अपराधी किसी भी प्रकार का नाच-गाना नहीं करेगा | न ही कोई ऐसा कार्य करेगा जिससे की समाज को कोई परेशानी हो |
  15. अपराधी बिना इजाजत शादी नहीं करेगा | किसी को धोखा नही देगा |
  16. पैरोल और इसके नियम के अनुसार अगर पैरोल परिवार के पालन पोषण के लिए ली गई है तो वह अपनी नौकरी नहीं बदलेगा, अगर किसी हालत में नोकरी बदलनी पड़े तो वह पुरे बोयरे के साथ कोर्ट, जेल अध्यछ व प्रशाशन को सूचित करेगा की उसने ऐसा क्यों किया व किन हालात में किया व उस नये काम व नोकरी करने की इजाजत भी लेगा | पशुओं को जान से नहीं मारेगा।

पैरोल ले के भाग जाना

जो कैदी पैरोल और इसके नियम पर ना चलकर वापस आने की बजाए भगौड़े हो जाते हैं। ऐसे कैदियों पर पंजाब गुड कंडक्ट प्रिजनर एक्ट 1962 के सेक्शन 8 की धारा ((2)) के तहत कार्रवाई होती है। इसमें दो साल की कैद व जुर्माने का भी प्रावधान है।
अगर व्यक्ति पैरोल पर छोड़े जाने के बाद दोबारा जुर्म करता है या पैरोल की शर्तो को तोड़ता है तो ऐसी स्तिथि में उसे दोबारा पैरोल नहीं मिलेगा । पैरोल की शर्तें तोड़ने पर व्यक्ति को वापस जेल भेजा जाता है। और सजा का शेष भाग उसको जेल में ही भुगतना पड़ता है।

अगर बरी होने बाद भी अगर वह व्यक्ति किसी और केस में दुबारा पकड़ा जाता है तो भी उसे दुबारा पैरोल नहीं मिलेगा |

पैरोल के नियमो के टूटने पर भी अगर उस व्यक्ति की का व्यवहार अच्छा है तो उसकी सजा में उसके अच्छे व्यवहार के कारण कमी हो सकती है | लेकिन ये तय है की उस व्यक्ति को दुबारा पैरोल नही मिलेगी |

जय हिन्द

द्वारा

अधिवक्ता धीरज कुमार

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