जानिये केस का सरकारी नौकरी पर असर कैसा पड़ता है

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प्रशन :- वकील साहब, किसी केस का सरकारी नौकरी पर असर कैसा पड़ता है क्या जेल जाने के बाद या कोर्ट का फाइन लगने के बाद सरकारी नौकरी चली जाती है ? हम इससे कैसे बच सकते है ? क्या क्रिमिनल केस के चलते सरकारी नौकरी मिल सकती है ? केस होने पर पुलिस वेरिफिकेशन से कैसे बचे ?

उत्तर :-

कोर्ट केस होना या फिर अफ. आई. आर. दर्ज होना अब एक आम बात हो गई है आजकल सभी लोग इससे पीड़ित है अब अगर कोई सरकारी नौकरी पर हो तो लाजमी है ये सवाल उसके मन में उठे की उसकी नौकरी पर केस का क्या असर पड़ेगा | आज हम इसी के बारे में जानेगे की सरकारी नौकरी पर किस केस का कैसा और क्या असर पड़ता है | और पुलिस केस होने पर पुलिस वेरिफिकेशन से कैसे बचे | आइये जाने क्रिमिनल केस का सरकारी नौकरी पर क्या असर पड़ता है

क्रिमिनल केस के असर को हम 4 भागो में बाटते है:-

1. अरेस्ट होने पर :-

अगर आप सरकारी नौकरी पर है और आप को, अफ. आई. आर. (चाहे वो केस दहेज, मार-पीट और मर्डर अन्य) , क्लान्द्रा (107/150/151 सी. आर. पी. सी. के अंतर्गत) या अन्य किसी एक्ट में केस होने के बाद, अगर आप अरेस्ट हो गए है और आप को 24 घंटे या एक दिन से ज्यादा पुलिस हिरासत (पुलिस स्टेशन) या जुडिशल हिरासत (जेल में) में रखा गया है तो आप के डिपार्टमेंट को पता चलते ही आप को सस्पेंड कर दिया जा सकता है | लेकिन आपकी नौकरी नही जाएगी आप बाद में भाली के लिए अपील कर सकते है | लेकिन अगर बाद में उसी केस में आपको सजा मिल गई तो नौकरी पक्का जाएगी

2. केस चलने पर :-

अगर, आप पर कोई क्रिमिनल केस चल रहा है लेकिन आप उसमे अरेस्ट नही हुए है या फिर अरेस्ट होने के बाद आप 24 घंटे में जमानत पर बाहर आ गये है तो आप को, आप का डिपार्टमेंट इस आधार पर सस्पेंड नही करेगा | लेकिन इसका पता चलने पर आप के केस की फाइल को मागवा सकता है और जजमेंट का इंतजार जरुर करेगा |

3. सजा होने पर :-

अगर आप को किसी भी कोर्ट से एक दिन यानि 24 घंटे से ज्यादा की सजा हो जाती है | लेकिन आप जमानत ले कर अपील के लिए समय ले लेते है और जेल नही जाते है तो भी एक दिन से ज्यादा सजा होने के कारण आप को नौकरी से सस्पेंड कर दिया जायेगा अगर आप ऐसी स्तिथि में अपील में नही जाते है तो आप को परमानेंट टर्मिनेट भी कर दिया जायेगा |

4. फाइन होने पर :-

अगर, आप पर किसी भी कोर्ट ने कोई क्रिमिनल फ़ाईन 100 रुपये या इससे ज्यादा का सजा के रूप में लगाया है तो आप सरकारी नौकरी से सस्पेंड कर दिए जायेंगे तथा इस की अपील नही करने की स्तिथि में आप को सरकारी नौकरी से परमानेंट टर्मिनेट भी कर दिया जायेगा |

(नोट :- यहा फ़ाईन ये मतलब सजा के रूप में या फिर सजा के बदले होने वाले फ़ाईन से है अगर इसके अलावा बिजली चौरी ,पानी, M. C. D. या फिर किसी और सरकारी या गैर सरकारी डिपार्टमेंट के द्वारा कोई दण्ड आप पर लगा है तो वो इस फ़ाईन की परिभाषा में नही आता है)

सिविल केस का सरकारी नौकरी पर असर :-  

सिविल केस में  कोई भी व्यक्ति आप पर सम्पति या फिर दूसरी परेशानी को लेकर केस कर सकता है ऐसे में आप ये जान ले की सिविल केस में कोई सजा नही होती है | और अगर कोई फ़ाईन भी होता है तो वो भी आप की सरकारी नौकरी पर असर नही डालता है |या मोटे रूप से कहे तो सिविल केस का सरकारी नौकरी पर असर नही पड़ता है | बजाए इसके की, आप को कोर्ट ने कोई आदेश दिया है और वो आपने नही माना है जैसे की कोर्ट आपको आदेश दे की आप, अपनी दिवार को रास्ते से पीछे ले ले | लेकिन ऐसा आप नही करे और दूसरी पार्टी आप पर अक्जिकुशन डाल दे और फिर भी कोर्ट की बात नही मानो और आप को जेल भेज दिया जाये तो वो जेल जाना आप को सरकारी नौकरी से सस्पेंड करवा देगा | क्योकि ये सजा आप को दण्ड के रूप में होगी |

हेज़ के केस का सरकारी नौकरी पर असर :-

जानिए इस प्रकार के केस का सरकारी नौकरी पर असर क्या होता है

  • अगर आप की पत्नी आप पर दहेज का केस धारा 498A या किसी और भी धारा में डाल कर आप को जेल करवा दे | तो आप सस्पेंड हो जाओगे | अगर केस को नही लड़ा या अपाल नही की तो टर्मिनेट भी | क्योकि पत्नी को मारना पीटना या दहेज मागना सरकार के खिलाफ एक क्राइम है |
  • अगर आप की पत्नी ने आप पर घरेलू हिंसा या फिर धारा 125 सी. आर. पी. सी. में कोई खर्चा बंधवाया है और आपने उसे नही दिया है और कोर्ट ने आपकी सेलरी से काटने के आदेश नही कर के आप को जेल भेज दिया है तो ऐसी स्तिथि में आपकी सरकारी नौकरी नही जाएगी क्योकि ये क्रिमिनल क्राइम नही है ये सिविल क्राइम है | हा ये हो सकता है, की डिपार्टमेंट आपके जेल में जाने की स्तिथि में आप को सस्पेंड कर दे लेकिन बाद में बाहर आकर आप केस के सारे डॉक्यूमेंट जब डिपार्टमेंट को देंगे, तो वो आपको बहाल कर देगा |
  • जानिये केस का सरकारी नौकरी पर असर कैसा पड़ता है

    जानिये केस का सरकारी नौकरी पर असर कैसा पड़ता है

कोर्ट केस चलते सरकारी नौकरी का मिलना या पुलिस वेरिफिकेशन का होना :-

केस भी कई प्रकार के होते है हर केस के हिसाब से पुलिस वेरिफिकेशन की रिपोर्ट बनती है आइये जाने कैसे इन केस का सरकारी नौकरी पर असर कैसे असर पड़ता हैइसको हम 3 भागो में बाटते है :-

1. अफ. आई. आर. केस के मामले में :-

अफ. आई. आर.  केस भी दो प्रकार के होते है हिनिअस क्राइम और नार्मल क्राइम, अगर सीधे तौर पर कहू तो कोई केस जिसमे सजा 3 साल या इससे कम है तो वो साधारण केसो में गिना जाता है वो केस अगर किसी पर चल रहा हो तो पुलिस वेरिफिकेशन में उसको सिरिअस नही लिया जाता है और आवेदनकर्ता को क्लीन चिट दे दी जाती है और सरकारी नौकरी मिल जाती है | लेकिन फिर भी पुलिस फौज और डिफेन्स से जुड़े डिपार्टमेंट में नौकरी नही दी जाती है |

अगर, कोई केस 3 साल से ज्यादा की सजा का है तो उसको हिनिअस क्राइम मान कर विचार किया जाता है और नौकरी नही दी जाती है |

2. क्लान्द्रा धारा 107/150/151 सी. आर. पी. सी. के अंतर्गत केस का सरकारी नौकरी पर असर:-

अगर आपके उपर किसी क्लेंद्रे का केस है जो की धारा 107/150/151 सी. आर. पी. सी. के अंतर्गत आता है तो आप को इस केस की जानकारी अपने जॉब के फॉर्म में भरने की जरूरत नही है और न ही ये किसी भी प्रकार से आपके पुलिस वेरिफिकेशन में सामने आएगा |इन केस का सरकारी नौकरी पर असर नही पड़ता है | क्योकि ये छोटे केस पट्टी इश्यूज कहलाते है | इनका रिकॉर्ड किसी भी व्यक्ति के चरित्र के लिए चेक नही किया जाता है | लेकिन अगर आप पर एक से ज्यादा ऐसे केस हो गए है तो आप के खिलाफ पुलिस बैड करेक्टर नोटिस दे कर केस रिपोर्ट DSP को भेज सकती है जो की आपको तड़ीपार भी कर सकता है

3. दुसरे पुलिस स्टेशन के केस का सरकारी नौकरी पर असर :-

अगर कोई अफ. आई. आर. केस किसी दुसरे पुलिस स्टेशन का है और आपने उसमे अपने घर का पता दिया है तो उसकी रिपोर्ट आपके एरिया के पुलिस स्टेशन में जरुर आएगी इसलिए कभी भी ये न सोचे की आपके पुलिस स्टेशन को इसकी जानकारी नही होगी और इस केस का सरकारी नौकरी पर असर नही पड़ेगा | लेकिन कई बार ऐसा नही होता है अगर किसी दुसरे पुलिस स्टेशन से कोई रिपोर्ट आती भी है तो वो कई बार सिर्फ आपके एड्रेस के लिए होती है की आप वहा रहते या नही | अगर केस होने वाला पुलिस स्टेशन आपके एड्रेस वाले पुलिस स्टेशन से दूर है तो में सजेस्ट करूंगा की आप उस केस का जिक्र अपने जॉब फॉर्म में नही करे | क्योकि आपके चरित्र की verification आपके पुलिस स्टेशन को आपके एरिया में ही करनी  होती है बाकी देश के पुलिस स्टेशन में आपका क्या रिकॉर्ड है वो चेक नही होता है क्योकि अभी वो सिस्टम नही बना है | (जब ऐसा सिस्टम बन जाएगा में यहा मेंशन कर दूंगा) 

4. सिविल केस का सरकारी नौकरी पर असर :-

अगर कोई सिविल केस आप पर चल रहा है तो आपको उसके बारे में डिपार्टमेंट को या सरकारी नौकरी के फॉर्म में जानकारी देने की जरूरत नही है क्योकि वो आपका क्रिमिनल रिकॉर्ड नही माना जाता है |और इस  प्रकार के केस का सरकारी नौकरी पर असर नही पड़ता है | लेकिन जैसा की आप को उपर बताया है की execution में सजा नही हो

केस के चलते सरकारी नौकरी कैसे बचाये :-

  1. जैसे की एक आइडिया जरुर आपके दिमाग में होगा की अगर हम अपने डिपार्टमेंट को बताये ही नही की हम जेल गये है या फिर हम पर कोई 100 रूपए या इसे ज्यादा का जुरमाना हुआ है तो आप बच सकते है | जी, हा ज्यादात्तर लोग ऐसा ही करते है | अगर जेल भी गये होते है तो मेडिकल लिव लगा कर काम चला लेते है | वैसे तो ये आइडिया भी कामयाब है पर इसमें किसी के द्वारा शिकायत होने का डर लगा रहता है अगर ये डर नही हो तो, आइडिया कामयाब है |
  2. अगर सजा का डर हो तो जितना हो सके केस को लम्बा चलने दे |
  3. अगर किसी भी केस में सजा हो भी जाए तो आप अपील जरुर करे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में तो अपील स्वीकार होने के बाद फाइनल सुनवाई में नंबर भी 15 से 20 सालो बाद आता है जब तक आप रिटायर हो चुके होते है |
  4. अगर, कोई कोर्ट आप पर जुर्माना करे तो कोशिक करे की वो 100 रुपये से ज्यादा नही हो |

केस होने की स्तिथि में पुलिस वेरिफिकेशन से बचना :-

  1. अगर आपके खिलाफ कोई अफ.आई.आर. किसी दसरे पुलिस स्टेशन में है तो ये तो लाजमी है की पुलिस वेरिफिकेशन आपके एरिया के पुलिस स्टेशन में होगी लेकिन इसमें सालो लग जाते है तो अगर आप सरकारी नौकरी के फॉर्म भर रहे है तो ये देख ले की कोई पुलिस वेरिफिकेशन आई है या नही अगर नही आई है तो आप उस केस का विवरण नही दे तो ठीक है |
  2. क्लान्द्रा धारा 107/150/151 सी. आर. पी. सी. के केस पुलिस वेरिफिकेशन में नही आते है | आपके खिलाफ इस प्रकार के कितने भी रिकॉर्ड हो या केस भी चल रहे हो तो भी आप इनका विवरण सरकारी नौकरी में नही दे और ना ही इनका कोई पुलिस रिकॉर्ड चेक होता है और न ही ये केस का सरकारी नौकरी पर असर कोई पड़ता है
  3. अगर कोई जुरमाना किसी केस में आप पर लगा है तो वो भी पुलिस वेरिफिकेशन में नही आता है इस प्रकार के केस का सरकारी नौकरी पर असर नही पड़ता है
  4. सिविल केसों का होना भी पुलिस वेरिफिकेशन में नही आता है

केस का नेट या e-court वेबसाइट पर दिखना :-

कई बार मुझे क्लाइंट  की काल आती है की उन लोगो के खिलाफ केस नौकरी मिलने से पहले ही अब खत्म हो चुका है लेकिन अभी भी वो नेट या e-court की वेबसाइट पर नजर आ रहा है | तो आप इस बात से निश्चिन्त रहे | वो डिटेल तो वहा से खत्म होगी नही | और एक नाम के बहुत से केस होते है और जैसे की मेंने उपर भी बताया है की अभी ऐसा कोई सिस्टम नही आया है की पुलिस आपके खिलाफ कोई केस सिर्फ नाम से पता कर सके | जब ऐसा सिस्टम अपडेट होगा में आप लोगो को जानकारी दे दूंगा |

कोर्ट जजमेंट और सरकारी नौकरी :-

आप के सामने कोई भी परेशानी आये तो उसके फेवर व अगेस्ट में बहुत जजमेंट है आप उनको लेकर लडे | जैसे की पुलिस वेरिफिकेशन में क्रिमिनल केस को छुपाने के लिए जजमेंट या फिर जेल जाने के बाद अपने सरकारी डिपार्टमेंट को नही बताया इस के लिए भी जजमेंट है | वैसे तो कोर्ट के निर्णय इस के फेवर में भी है और अगेस्ट भी और समय-समय पर बदलते रहते है इसलिए में उनका विवरण नही दे रहा हु |

updated on 11.04.2019

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जय हिन्द

द्वारा

DHEERAJ KUMAR ADVOCATE

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