जाने अच्छे वकील साहब का चयन कैसे करे ?

जाने अच्छे वकील साहब का चयन कैसे करे ?

आज के समय में हम वकीलो की भी एक बड़ी फ़ोज खड़ी है जिसमे उन लोगो की तादाद ज्यादा है जो की नौकरी से रिटायर, शोकिया या फिर बेरोजगारी के कारण वकील बन जाते है | ऐसे वकील साहब कम ही है | जो की अपने पेशे के प्रति इमानदारी और मेहनत से वकालत करते है आइये जाने की एक अच्छे वकील साहब का चयन किन आधार पर किया जाये ?

1. उम्र देख कर नही करे वकील साहब का चयन :-

अगर, आप किसी वकील साहब से मिलने के लिए जाते है तो कभी भी उनकी उम्र पर नही जाये | क्योकि बहुत सारे लोग जो की govt. job से रिटायर है ख़ास कर के पुलिस, नेवी, एयरफोर्स, तहसील इत्यादि से, ये लोग रिटायर होने के बाद वकालत शुरू करते है | इन लोगो को कानून की जानकारी भी कम होती है और बुडापे के कारण कोई नई चीज सीखी भी नही जाती है | जिसका खामयाजा क्लायंट को भुगतना पड़ता है और बदनाम सभी वकील साहब होते है | इसलिए अपने वकील साहब करने से पहले ये जान ले की वे अपनी जवानी से ही वकालत कर रहे है या अभी कुछ सालो से ही रिटायर होकर वकालत में आये है | इसके लिए आप उनसे सीधे तौर पर सवाल करे और इन जालो से बचे | में स्वय ऐसे लोगो की वकालत के खिलाफ हु | वकालत बहुत ध्यान और मेहनत का काम है हमारी जरा सी गलती किसी भी इन्शान का बहुत बड़ा नुकसान कर सकती है | उसकी जिन्दगी तक बर्बाद कर सकती है | इसलिए किसी के बुडापे पर ना जाये |

2. वकील साहब का चयन उनकी प्रक्टिस से या enrolment नंबर से जान कर करे :-

 

हम लोग जब वकील बनते है तो हमे अपनी स्टेट की बार काउंसल में अपना enrolment करवाना होता है | जिससे की हमे वकालत करने का एक आई डी / लाइसंस नंबर मिलता है | जिसे हम लोग अपने वकालतनामे पर लिखते है जैसा की मेंरा enrolment नंबर  D/1379/2004  है जिसमे D से मतलब Delhi राज्य से है और 1379/2004 से मतलब में सन 2004 में enrol  होने वाला 1379 वकील हु मुझे पहले इस साल 1378 लोग enrol हो चुके थे | साफ शब्दों में कहे तो इससे ये पता चलता है की में सन 2004 से  वकालत में हु |

अच्छे वकील साहब का चयन कैसे करे ?

अच्छे वकील साहब का चयन कैसे करे ?

आप लोग अपने  वकील साहब से उनका enrolment नंबर पूछे | वैसे तो ये उनके विजीटिंग कार्ड पर भी लिखा होता है लेकिन नही लिखा है तो आप इसे जरुर जाने | इससे आपको पता चलेगा की आपके वकील साहब कितने सालो से वकालत कर रहे है | और उनको कितना तजुर्बा  है |

3. ऑफिस की बजाये कोर्ट में मिले :-

जब भी आपको पहली बार वकील साहब का चयन करने के लिए जाये तो ऑफिस की बजाये उनसे कोर्ट में ही मिले | वहा आपको पता चलेगा की उनके पास आज की कितनी फायले है , कैसा satup है तथा उनको अगर बीच में कोर्ट में केस करने भी जाना पड़े तो आप उनके साथ जा कर भी देख सकते है की वे कोर्ट में कैसे बोलते है | अपनी बात कैसे रखते है | और कैसे कोर्ट को समझा पाते है | उनकी बातो से पता करे की आज उनके पास आज कितने केस लगे थे | उन्होंने किस केस में क्या किया | वे केस के बारे में कैसे सोचते है इत्यादि |

4. स्पेस्लिस्ट वकील साहब का चयन :-

वकील साहब भी की प्रकार के होते है जैसे (1) सिविल यानि दीवानी वकील साहब जो की जमीन ज्यदाद से सम्बन्धित केस करते है (2) क्रिमिनल लॉयर, जो की क्राइम से सम्बन्धित हि केस लड़ते है (3) लेबर लॉ या कैट के वकील साहब जो की सरकारी और गैर सरकारी नौकरी करने वाले लोगो के केस लड़ते है (4) इनकम टैक्स लॉयर (5) रिवेन्यु से सम्बन्धित वकील साहब इत्यादि | तो आप पहले ये जान ले की जिस वकील साहब को आप अपना केस देना चाहते है वो वकील साहब उस प्रकार के केस में एक्सपर्ट है या नही | क्योकि कोई भी वकील साहब सिर्फ एक ही फिल्ड में अच्छा एक्सपर्ट हो सकता है ज्यादा से ज्यादा दूसरी में भी | लेकिन वह इन सभी फील्डो का जानकर नही हो सकता है | इसलिए एस बात की तसल्ली कर ले की आप सही वकील साहब से ही काम करवा रहे है |

5. स्टेट्स द्वारा वकील साहब का चयन:-

वकील साहब के चैम्बर या ऑफिस को देखे की वो कैसा बना है | वहां पर कितने जूनियर वकील साहब काम कर रहे है | कितनी फाइले रखी है | वकील साहब कौन की कार इस्तेमाल करते है | इन सब बातो से आप ये पता लगा सकते है की वकील साहब अच्छे व स्टेब्लिश वकील है या नही | अगर वे काम करते है तो ये सब मेंटेन कर रहे है | वैसे यहा ये भी बता दू की कई वकील साहब ऐसे भी होते है जो की अपना स्टेट्स तो बहुत ही ज्यादा अच्छा दिखाते है | लेकिन वे काम सही नहीं करते है | ज्यादातर ऐसे वे लोग होते है जो की सरकारी नौकरी से रिटायर होकर वकील बनते है | ऐसे वकील साहबो से आप सावधान रहे उनके स्टेट्स के चक्करों में नही पड़े |

6. जानकार द्वारा ही वकील साहब का चयन:-

आप, जब भी कोई वकील साहब हायर करना चाहे, तो अपने आसपास किसी जानकार के द्वारा ही उनके पास जाये | और खास कर उन लोगो के द्वारा जिन्होंने उन वकील साहब से अपना काम भी करवा रखा हो | इससे फायदा ये होगा की आप के केस में जानकारी के कारण ज्यादा ध्यान रखेगे तथा कोई बात होने पर स्पेशल समय दे कर काम भी सम्भाल लेंगे | कई बार केस में ऐसे मोड़ आ जाते है जिसमे केस का खर्चा बड जाता है या फिर वकील साहब के हाथ में होता है की वे केस का खर्चा बडाये या फिर उसे समय से पहले ही जीत कर खत्म करवा दे | उस समय आपकी जानकारी और उस जानकारी की शर्म काम आती है और आपका काम आसान हो जाता है |

चेतावनी :-

जैसा की हम देखते है की बेईमान, चालू या गलत लोगो का ही कोर्ट में आना जाना होता है ऐसे में लोग वकील साहब का चयन करने के लिए उनसे ही सम्पर्क करते है | की उनको ज्यादा पता होगा की कोर्ट में कौन ज्यादा अच्छे वकील साहब है | आपकी ये धारणा बिलकुल गलत है | जो लोग स्वय गलत है वे आपको भी गलत वकील साहब के पास लेकर जायेंगे या फिर कम फीस के मामले में या अपने कमिशन के चक्कर में आपको लुट लेंगे | और आपका काम भी बिच में ही अटक जायेगा | इसलिए इन पडोस के बेईमान लोगो के सम्पर्क में नही आकर किसी अच्छे इन्सान के जानकार वकील साहब का चयन करे | यहा, मेरा मतलब पडोस के बेईमान व ठग किस्म के लोगो से है ना की बाकी ऐसे लोगो से जो की हालात का शिकार होकर कोर्ट के चक्कर में पड गए है |

7. वकील साहब का चयन उनने नाम के अनुसार :-

कई बार लोग नामी वकील साहबो के पास भी काम के लिए जाते है और अपना काम करवाते है | इसमें कोई गलत बात नही है | आप सीधे तौर पर जा कर ऐसा कर सकते है | लेकिन इसके लिए पहले ये जान ले की,ये जरूरी नही की बड़े वकील लोग केस नही हारते है | कई बार, वे अपने से जूनियर वकील साहबो से भी केस हार जाते है | बड़े व नामी वकीलों में सबसे बड़ी परेशानी ये होती है की काम की अधिकता की वजह से वे अपने जूनियर वकीलो को कोर्ट में भेज देते है | जिससे की कई बार एक अच्छा केस भी ख़राब हो जाता है | इसलिए अपना केस देने से पहले उनसे इस बारे में स्पस्ट रूपा से बात कर ले |

8. वकील साहब की नोलिज को चेक करे :-

वकील साहब का चयन करने का सबसे अच्छा तरीका उनकी नोलिज को जानना है | आप, जब भी वकील साहब से अपने केस के बारे में बात करे तो उनसे पूछे की इसके बारे में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट क्या कहती है तथा वो कौन सी जजमेंट है | अगर आपके वकील साहब इस बात का जवाब जजमेंट के नाम के साथ दे दे | तो जान ले की उनको इस विषय में ज्ञान है और वे आपका केस बहुत ही अच्छी तरह लड़ सकते है | अगर आपको किसी कानून के बारे में पहले से नौलिज है तो आप उसके बारे में पूछ कर भी उनकी नौलिज चेक कर सकते है की वे कितने पानी में है |

9. पहली मुलाकात में फीस की मांग :-

सबसे पहले ये जान ले की कोई भी वकील साहब अगर आपको फ्री में सलाह दे रहे है या फिर आपना कीमती समय फ्री में बातो में दे रहे है तो या तो उनके पास काम की कमी है या फिर वे अच्छे वकील साहब नही है | क्योकि अच्छे व बड़े वकीलो के पास फ्री में बात करने और अपना समय नष्ट करने का समय नही होता है | अगर कोई भी वकील साहब आपसे पहली मुलाकात के लिए भी पैसे मांगे तो ये जान ले की वे अच्छे वकील साहब है और बेशक ही महगे हो सकते है | लेकिन आपको आपके केस की जानकारी या राय बहुत ही अच्छी देंगे | इसलिए वकील साहब का चयन करने में एस बात का विशेष ध्यान दे | इसके अलावा अगर आप किसी जानकार के साथ पहली बार किसी वकील साहब से मिलने के लिए जाते है और वो आपसे पहली मुलाकात के पैसे नही ले तो ये उस जानकर को सम्मान देना भी हो सकता है | लेकिन ऐसे वकील साहब दुबारा फ्री में बात नही करते है |

10. बहस के तरीके से वकील साहब का चयन :-

लोग सोचते है की अच्छे वकील साहब वही है जो की कोर्ट में जोर-जोर से चिल्ला-चिल्ला कर बोले, जज साहब से ऐसे बात करे की उनकी आवाज ही ना निकले | ये बिलकुल गलत है ऐसा सिर्फ कुछ हालात में होना ही सम्भव होता है हर जगह नही | हर जज साहब के सामने भी नही | में तो इस सोच से बहुत ही ज्यादा परेशान हु | एक सक्सेशन एक्ट के केस में जो की कुछ तारीखों का केस होता उसमे जज साहब को क्लाइंट से कुछ पूछताछ करनी होती है की ये वही व्यक्ति है या नही | उन जज साहब की कोर्ट में मैने काफी केस लडे थे, वे मुझे अच्छे तरह जानते थे | और केस में ना तो क्लाइंट से ज्यादा पूछताछ करते थे और ना ही मुझसे ही पूछते थे, सिर्फ आगे की कार्यवाही का आर्डर दे देते थे | वे हमे छोटी तारीखे दे कर काम कर रहे थे | तो मेरे क्लाइंट को ये परेशानी हुई की आप जज साहब से चिल्ला कर बात क्यों नही करते हो इतने प्यार और मुस्कुरा के बात क्यों करते हो? में हेरान था उन्हें समझा रहा था लेकिन वे मान नही रहे थे, बोले की आप मेरा केस सही तरीके नही लड़ रहे हो में तो केस हार जाऊंगा | मुझे पैसे नही मिलेंगे | शांति से बात करने पर पता चला की उन्होंने इससे पहले कोर्ट सिर्फ फिल्मो में ही देखा था और ये उसी का असर था | फिर समझाने पर उनके समझ में आया की हकीकत की कोर्ट फिल्मो की कहानी जैसी नही होती है | जज हम लोगो की चिल्लाहट सुनने के लिए या फिर अपनी बेज्यती करवाने के लिए नही बेठे है | उन्हें समझाया की आप अपने काम से मतलब  रखे | आप केस जीतेंगे और हुआ भी ऐसा ही | केस के जितने पर ही उन्हें मेरी बात सही लगी |

         दरअसल, हर जज साहब का अपना बात करने का तरीका होता है हम वकील लोग अच्छी तरह जानते है की, किस जज साहब से कैसे बात करनी है कुछ जज साहब की इंग्लिश कमजोर होती है उनसे हम हिंदी में ही बात करते है ताकि वे हमारी बात को सही तरीके से समझे | कुछ जज साहब बतमीज भी होते है उनसे हम कठोर शब्दों में बात करते है | कुछ जजो से हमारी टुनिंग अच्छी हो जाती है, तो उनसे ज्यादा कहने की जरूरत नही होती है | कुछ हस कर बात करने से खुश होते है | लेकिन मेन काम होता है, जज साहब को अपनी बात समझाना, उनको अपने तरीके से सोचने के लिए मजबूर करना और केस जितना | इसलिए आप लीग सिर्फ इस बात पर ध्यान दे की आपके वकील साहब, जज साहब को कन्विंस कर पा रहे है या नही वे अपना काम निकाल पा रहे है या नही | इस बात पर ध्यान नही दे |

                   ज्यादा जोर-जोर से चिल्लाने वाले वकील ही बड़े वकील नही होते है | कई बार जज साहब ऐसे वकील सहबो से चिड भी जाते है | इसलिए समझदारी से काम ले | फिल्मो के चक्कर में ना पड़े  | हकीकत फिल्मो से बहुत अलग है |

11. नये वकील वकील साहब का चयन :-

वैसे अगर आपका केस या कोई क़ानूनी काम ज्यादा गम्भीर नही है तो आप नये वकील साहब को भी काम का मौका दे सकते है तथा अपना काम निकलवा सकते है | ये वकील साहब नये होते है ज्यादा जोश से काम करते है तथा सस्ते में भी काम कर देते है | इसलिए काम के लिए नये वकील साहब का चयन कोई गलत निर्णय नही होता है | लेकिन ऐसा छोटे केसों में ही बेहतर होता है | बड़े केसों में ये रिस्क नही ले |

12. फीसके आधार पर वकील साहब का चयन:-

वकील साहब और क्लाइंट के बीच में फीस का महत्व सबसे ज्यादा होता है अगर इसमें जरा सी भी गडबड हो जाती है तो दोनो के बीच दरार पड जाती है | अगर आपके वकील साहब अपनी फीस आपको साफ़ व स्पस्ट रूप से बता देते है और बिना किसी झिझक के साफ रूप से तय करते है | तो आप उन वकील साहब पर विश्वाश कर सकते हो | ऐसे वकील साहब अपने सम्बन्धो और केस को ज्यादा महत्व देते है और आपका केस अच्छी तरह से लड़ते है  |

13. कोर्ट में पेरवी करते हुये वकील साहब का चयन करना :-

वैसे ये काफी पुराना तरीका है | इसे लोग पहले इस्तेमाल करते थे, आप अब भी कर सकते है | जैसे की आप का केस दहेज से सम्बन्धित है और महिला कोर्ट में लगना है तो आप कोर्ट में जितनी भी महिला कोर्ट है उनमे सुबह जाकर बैठ जाये और देखे की कौन से वकील साहब कोर्ट में अपने केस को अच्छी तरह से प्रेजेंट करते है | इस प्रकार से कुछ दिनों में ही आपको पता चल जायेगा की कौन से वकील साहब आपके केस के लिए सही है | बाद में आप उन से सम्पर्क करे अपना केस दे सकते है |

14. कम फीस में केस को करने को तयार होने वाले वकील साहब :-

कई बार ऐसा होता है कई वकील साहब आपका केस सस्ते में या फिर अभी कुछ पैसे देकर करने को तयार हो जाते है | ऐसे वकील साहबो से आप बचे क्योकि या तो उन्हें कुछ आता नही है और वे केस में एक्स्परिमेंट करना / सीखना चाहते है या फिर वे आपको अभी फसा कर बाद में ज्यादा पैसो की मांग करके पैसा ऐठना चाहते है | गलत लोग हर जगह होते है | इस प्रोफेशन में भी है आप उनकी पहचान करे व उनसे बचे |

क्लाइंट को वकील साहब का चयन के बाद कौन सी सावधानिया रखनी चाहिए :-

  1. समय पर वकील साहब को फीस दे व अपनी फीस का स्वरूप तय कर ले |
  2. आप चाहे तो फीस से सम्बन्धित अग्रीमेंट भी करवा सकते है |
  3. अपने वकील साहब से प्यार व सम्मान से बात करे | तथा अपने केस से सम्बन्धित ही बातो का जिक्र करे |
  4. वकील लोग सिर्फ आपस में केस लड़ते समय ही दुश्मन होते है वरना वे भी आम इन्सान ही है और कोर्ट रूम से बाहर मिलने पर आपस में खुश होकर ही मिलते है | इसलिए अपने वकील साहब पर विश्वाश करे | शक के चक्कर में वकील नही बदले | बार-बार वकील बदलने से आपका केस कमजोर होता है |इसलिए हो सके तो अंत तक एक ही वकील साहब रखे |
  5. अपने वकील साहब को ऐसे दिखाए की आपको भी केस के बारे में जानकारी है और आपके यार दोस्त इसमें आपकी मदद करते है | ताकि आपके वकील साहब अगर केस में कुछ झूठ बोल कर ज्यादा पैसा कमाना चाहे तो ऐसा ना कर पाए और आपका केस अच्छी तरह लड़े |

ज्यादा अच्छी जानकारी के लिए इस नंबर 9278134222 पर कॉल करके  online advice ले advice fees  will be applicable.

जय हिन्द

द्वारा अधिवक्ता धीरज कुमार

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