जानिए कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) इसके नियम तथा कानून

कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  employees provident fund scheme क्या होती है इसके नियम, उदेश्य, उपबंध क्या है तथा कर्मचारी केस कैसे जीते व इसमें सजा का क्या प्रावधान है |

उत्तर :-  यह देखने में आता है की कम मजदूरी प्राप्त करने वाले मजदूर की बचत करने की क्षमता भी बहुत कम होती है और सेवानिवृत्त होने या छटनी किए जाने पर उसके पास इतना धन नहीं होता कि वह अपना शेष जीवन और आजीविका का सही तरीके से निर्वाह कर सके | बुडापा शारीरिक रूप से दुखदाई होता है परंतु मजदूर के लिए और भी ज्यादा होता है | इसलिए इन्हीं बातों को देखते हुए सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) चालू की | इसकी स्थापना नवम्बर 15, 1951 में की गयी थी | लेकिन इससे सम्बन्धित कानून 1952 में आया था जो की जम्मू कश्मीर राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत में लागू है

कर्मचारी भविष्य निधि योजना  (EPF) क्या है :-

EPF scheme law provisions hindi कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)

कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)

कर्मचारी भविष्य निधि योजना की स्थापना कम्पनी या कारखानों में कार्यरत कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए की गयी थी | तथा किसी भी कारखाने या संस्था का ये कर्तव्य है की अगर उसके पास 20 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत है तो वो उनको कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय के पास रजिस्टर करवाए | अगर कोई कम्पनी ऐसा नही करती है तो वो कम्पनी कानूनी की नजर में दोषी साबित होती है तथा शिकायत करने पर सजा व जुर्माने दोनों के दंड की भागीदार होती है |

कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) मे कैसे पैसा जमा होता है :-

जब कर्मचारी किसी कारखाने या कंपनी में काम करने लगता है तो उसकी बेसिक वेतन का 12 % उसके वेतन से काटा जाता है तथा उसकी कंपनी की तरफ से भी 12 % का ही योगदान दिया जाता है लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  में कंपनी द्वारा सिर्फ 3.77 % ही पैसा जमा करवाया जाता है बाकी का 8.33 % पैसा कर्मचारी सेवा निवर्ती (Employee’s Pension Scheme-EPS) योजना में जमा करवाया जाता है |

इसी धन एकत्रित होने व इस अकाउंट को कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) कहते है इसका संचालन केंद्र सरकार अपनी देख रेख में बोर्ड द्वारा करती है इसमें भारत सरकार द्वारा ब्याज भी दिया जाता है जो की अभी 7.33 % है तथा किसी भी शर्त पर कानूनी रूप से 5.5 % से कम नही होगा |

कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) की निगरानी व प्रबंध की जिम्मेदारी :-  

इस योजना के प्रबंध व देख रेख की जिम्मेदारी भारत सरकार के भविष्य संगठन The employee Provident Fund Organization-EPFO की होती है तथा इसके देश के सभी राज्यों व क्षेत्रों में इसके ऑफिस है  जो अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली शिकायतों को देखते है  इससे कर्मचारी को जोड़ने का जिम्मा कम्पनी का होता है लेकिन चाहे तो कर्मचारी स्वय भी इससे जुड़ सकता है |

कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  का पैसा कब मिलता है :-

(1) जब कोई कर्मचारी अपनी कंपनी को छोड़ता है या कम्पनी से निकला जाता है और उसे अगले 2 महीने से कोई रोजगार नही मिलता है तो वह अपनी भविष्य निधि से पैसा निकाल सकता है  (2) अगर कर्मचारी 60 वर्ष की आयु को पार कर जाता है तो सेवा निवार्ति होने पर (3) किसी दुर्घटना के कारण कोई कार्य न कर पाने पर (4) कर्मचारी की मिर्तु होने पर उसके परिजनों को |

क्या कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  में नॉमिनेशन की सुविधा होती है :-

जी हा, अगर कर्मचारी चाहे तो तो वो अपना नोमनी घोषित कर सकता है तथा समय अनुसार उसके नाम में बदलाव भी कर सकता है

क्या कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  में पेंशन मिल सकती है :-

जी हा आप चाहे तो तो आपको इसमें से हर माह  पेंशन भी मिलनी शुरू हो सकती है लेकिन उसकी कुछ शर्ते व नियम भी है

  • पेंशन मिलने के लिए आपकी उम्र 58 वर्ष होनी जरूरी है इससे पहले आप की पेंशन शुरू नही होगी
  • पेंशन मिलने के जरूरी है की आप ने लगातार 10 वर्ष तक किसी कंपनी या कारखाने में नौकरी की है अगर आपने अपनी नौकरी लगातार किसी एक जगह यानि कंपनी में नही की है तो ऐसी स्तिथि में आपका कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) अकाउंट आपकी नई नौकरी की जगह पर ट्रान्सफर हुआ हो
  • पेंशन न्यूनतम 1000 रूपए व अधिकतम आपके वेतन के अनुसार ज्यादा भी हो सकती है
  • ये पेंशन कर्मचारी को आजीवन मिलती है तथा उसके मरने के बाद उसकी पत्नी को तथा सेवा निवार्ति से पहले मिर्तु होने पर उसके नोमनी को |

क्या कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)   में कर्मचारी अपने वेतन का 12 % से भी ज्यादा पैसा कटवा सकता है तथा इसके क्या लाभ होंगे :

जी हा, कोई भी कर्मचारी अपने वेतन का 12 % से भी ज्यादा पैसा अपने अकाउंट में कटवा सकता है लेकिन उसकी कंपनी उसको अपने फण्ड से उनकी बेसिक सेलरी का सिर्फ 12 % ही देगी तथा उससे ज्यादा का कोई भी शेयर नही देगी | लेकिन केंद्र सरकार सारे फंड पर एक जैसा ही ब्याज देगी लेकिन अगर आप अलग से पैसा जमा करवाते हो जो की आपके वेतन से नही कटा है तो उस पर केंद्र सरकार कभी भी कोई ब्याज नही देती है

क्या कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) से सारा पैसा निकाला जा सकता है :- अगर कर्मचारी ने अपनी लगातार 10 वर्ष की सर्विस पूरी कर ली है तो आपको अपने कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  का पूरा पैसा मिलेगा अन्यथा आपने जितने साल सर्विस की है उसके हिसाब से मिलेगा

क्या नौकरी बदलने के तुरंत बाद अपने कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  से पैसा निकालना क़ानूनी होगा या गैरकानूनी :-

अगर आप नौकरी छोड़ने के बाद अगले 2 महीने तक बेरोजगार हो तो आप 2 महीने के बाद सारा पैसा निकल सकते है लेकिन अगर आपको नौकरी छोड़ने के 2 महीने के अंदर ही नौकरी मिल गई है और आप अपना पैसा निकलते है तो वो गैरकानूनी होगा | इस पर केंद्र सरकार कार्यवाही कर सकती है | लेकिन आमतोर पर कोई कार्यवाही नही करती है |

लेकिन अगर (इम्पलोई पेंशन स्कीम) के पैसो को 10 वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है | तो ये पैसा आपको अपनी सेवा समाप्ति के पश्चात ही मिलेगा जिसे आप एक क़िस्त के रूप में या फिर पेंशन के रूप में ले सकते है |

कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  में जमा पैसे पर कोई टैक्स छूट भी मिलती है या नही :-

जी हा, अगर आपने कम से कम 5 वर्ष की नौकरी क्र ली है है तो तो पैसा निकलते समय आपको टैक्स में 100 % छुट मिलती है  |

क्या आप कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  का हिस्सा बनने से मना कर सकते है : –

जी हा, आप चाहे तो ऐसा कर सकते है लेकिन इसकी कुछ शर्ते है

  • लेकिन इसके लिए आपका वेतन 15,000/- से कम होना जरूरी है ऐसा होने पर आप 11 नंबर का फार्म भर कर इस योजना का हिस्सा बनने से मना कर सकते है लेकिन अगर आपकी सेलरी 15 हजार से ज्यादा है तो आपको ये योजना लेना अनिवार्य है |
  • इसके अलावा अगर एक बार कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) के सदस्य बन जाते है तो फिर आप इसे लेने से मना नही कर सकते है |
  • अगर आपके पास पहले से ही EPF के सदस्य है और नई कम्पनी में जाते है तो भी आप इसे लेने से मना नही कर सकते है क्योकि आधार कार्ड से जुड़े होने के कारण ये आपको पहचान लेगा |

आप किन परिस्तिथियों मे अपने कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  का पैसा निकाल सकते हो :- 

वैसे आप अपने EPF से पैसा नही निकाल सकते हो | लेकिन कुछ खास मजबूरियों व मौको पर आप अपनी निधि का कुछ प्रतिशत उस मजबूरी के अनुसार ही निकल सकते हो तथा ये प्रतिशत भी उस मजबूरी या मौके के अनुसार तय होता है जो की आगे लिखित है :-

  • आप अपने व परिवार की बीमारी जिसमे आपकी पत्नी, बच्चे, व आपके माता पिता सामिल है के इलाज के लिए अपने वेतन का 6 गुना पैसा निकाल सकते है | ये सारे फंड का 25% से अधिक नही होना चाहिए | इसमे वे सारी बिमारिया सामिल है जिसमे एक व्यक्ति हॉस्पिटल में एडमिट होता है
  • आप अपने बच्चो व भाई बहन की शादी के लिए भी अपने कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  से पूरी रकम का 50 % तक ले सकते हो और ये 50 प्रतिशत आप तीन बार में ले सकते हो |
  • आप नया घर खरीदने या होम लोन चुकाने के लिए भी अपने वेतन का 36 गुना पैसा ले सकते हो लेकिन ये सारे फंड का 50 प्रतिशत से अधिक नही होना चाहिए |
  • घर की मरम्मत के लिए सरे फंड का 25 % ही ले सकते हो |

 कर्मचारी भविष्यनिधि योजना के अन्य नियम :-

  • जिन संस्थानो या कंपनियों  में  20 या 20 से अधिक व्यक्ति काम करते हैं वहां पर यह नियम लागू होता है |
  • इस योजना को लागु करना अनिवार्य है अन्यथा शिकायत करने पर और ऐसा न होने पर जुर्माने व सजा का भी प्रावधान है |
  • कर्मचारी भविष्यनिधि योजना के अलावा कंपनी की तरफ से कर्मचारी को जीवन बीमा, एक्सीडेंट या मुर्तु होने की स्तिथि में या पेंशन स्कीम या इस प्रकार की और स्कीमे भी दी जा सकती है जिनका लाभ कर्मचारी को देना अनिवार्य है तथा छुपाने पर सजा व जुर्माने का प्रावधान है |

यूनिवर्सल अकाउंट नंबर UAN number क्या है :-

जब आप कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  के सदस्य बनते हो तब आप को एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर UAN number दिया जाता है जो आप की पहचान को पूरी दुनिया में निश्चित करता है ये आपकी एक पहचान संख्या होती है बिलकुल आधार कार्ड की तरह आपके सर्विस या कंपनी बदलने पर या नई कंपनी के अकाउंट नंबर बदलने पर भी ये आपका अलग parmanant अकाउंट नम्बर बना रहता है

जब नौकरी या कंपनी बदलने पर आपका EPF अकाउंट नम्बर बदल जाता है तो नया हर अकाउंट इसी परमानेंट UAN नंबर से जुड़ जाता है। और आपका पैसा पुराने EPF अकाउंट से नए EPF अकाउंट में आ जाता है

यू.ए.एन. एक्टिवेशन और लॉगइन और ऑनलाइन सेवा :-

आप मोबाइल अप्प या फिर ऑनलाइन भी अपने यू.ए.एन. के द्वारा अपने अकाउंट का उपयोग कर सकते है आइये जाने आप क्या सेवाए प्राप्त कर सकते है जैसे :-

  • अपनी नौकरी या फिर कंपनी बदलने की स्तिथि में आप अपने पैसे पुराने अकाउंट से नये अकाउंट में अपने यू.ए.एन. नम्बर के माध्यम से ट्रान्सफर कर सकते है
  • ऑनलाइन या अप्प के द्वारा आप अपना पैसा निकाल कर किसी दुसरे अकाउंट में या किसी और को ट्रान्सफर कर सकते है वैसे सारे पैसे को निकालने के लिए आपका UAN नम्बर का आधार नम्बर से लिंक होना व KYC उपडेट होना जरूरी है इससे पेंशन लेने में भी आसानी होती है
  • ऑनलाइन सुविधा होने पर आप अपने अकाउंट में छोटे –मोटे हुए किसी भी प्रकार के बदलाव या किसी त्रुटी को सुधार सकते है तथा बड़े बदलाव या सुधार के लिए HR डिपार्टमेंट से करवा सकते है
  • ऑनलाइन माध्यम से आप ये देख सकते है है की आपने कितनी कंपनियों में कार्य किया है तथा किस कम्पनी से कितना फंड लिया है आप अपना बैलेंस भी चेक कर सकते है |

कर्मचारी कोर्ट केस कैसे करे :-

जैसा की आपने जाना की किसी भी कंपनी को अपने कर्मचारी के अकाउंट में उसकी सलेरी से कटने वाले 12 % अमाउंट जितना ही पैसा ट्रान्सफर करना होता है जो की वे नही करते या कम करते है तथा नौकरी छोड़ने पर पूरी सेलरी भी नही देते है तो ऐसे में कंपनी के खिलाफ आप कानूनी कार्यवाही कर सकते है ये कानूनी कार्यवाही आप अपनी कंपनी में कार्यरत रहकर भी कर सकते है (1) सबसे पहले आप अपनी कंपनी को एक लीगल नोटिस दे जिसमे आपकी सारी मांगे लिखी हो तथा उनको पूरा करने का समय 15 दिन भी लिखा हो (2) इसके अलावा आप अपनी शिकायत सीधे कर्मचारी शिकायत अधिकरण के पास भी कर सकते है जो की हर राज्य व में उपलब्ध है अगर कोई रिस्पोंस मिलता है तो ठीक है वेरना आप अपना केस लेबर कोर्ट में फ़ाइल् कर सकते है

कर्मचारी कोर्ट केस कैसे जीते :-

  • केस जितने के लिए सबसे पहले आप को जो भी सेलरी मिलती थी उसका सबूत सेलरी स्लिप या अकाउंट स्टेटमेंट जो भी हो वो तथा आप अपना कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF)  अकाउंट नंबर भी सबूत के तौर पर पेश करे |
  • केस डालते समय आप को इससे क्या हानी हुई है उसे अपने लीगल नोटिस व कोर्ट केस में जरुर लिखे | तथा उसकी छतिपूर्ति की मांग करते हुए एक सही अमाउंट लिखे |
  • कोर्ट में केस डालने के बाद आप अपने आप को बेरोजगार ही दिखाए अगर आप ऐसा नही कर सकते है तो कोई बात नही जितने दिन आपको नोकरी नही मिली है उतने दिन की सेलरी आपको कम्पनी से मिलेगी | अगर आप अपने आप को कोर्ट केस के दोरान बिलकुल ही बेरोजगार दिखाते है तो आपको उस कम्पनी से उतने ही समय की बेसिक सेलरी जरुर मिलेगी |
  • केस सिर्फ डाक्यूमेंट्स के आधार पर ही लडा जाता है जिसमे कर्मचारी के हारने के चांस ना के बराबर ही होते है इसलिए अपने डाक्यूमेंट्स को सम्भाल कर रखे |
  • अगर कम्पनी ने आपको किसी बात के लिए प्रताड़ित किया है तो उसके सबूत ऑडियो, विडियो, कोई दस्तावेज या फिर गवाह के द्वारा आप साबित करे | आपको उसका अलग से मुआवजा मिलेगा |
  • आप चाहे तो केस के चलते हुए भी बेरोजगारी या कार्य न कर पाने के हालात में अपनी कम्पनी से अपनी बेसिक सेलरी का आधा भाग ले सकते है पर ऐसा कोर्ट के आदेश पर ही सम्भव है | और ऐसा ज्यादातर दुर्घटना के केसों में होता है |
  • केस में सबसे पहले कम्पनी को पार्टी बनाये फिर अगर किसी और व्यक्ति से भी परेशानी है तो उस व्यक्ति को उसकी पोस्ट व नाम के साथ पार्टी बनाये तथा केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाये और केस फ़ाइल् करे |

सजा :- 

इस अधिनियम के अनुसार कोई कम्पनी या व्यक्ति किसी भी कर्मचारी के पैसे का हरण करता है या ऐसा करने का प्रयास करता है तो वो दंड व जुर्माने दोनों के दण्डित होगा | व केस डालने से लेकर केस का निपटारा होने तक उस निधि को ब्याज समेत जो भी कोर्ट तय करेगी वह देगा |

  • लेबर लॉ की धारा 14A के अनुसार अगर कोई कंपनी (डायरेक्टर) किसी कर्मचारी की निधि का हरण करेगा | तो वो कम से कम 2 साल व ज्यादा से ज्यादा 5 साल तक की सजा व जुरमाना जो की 25 हजार तक का हो सकेगा से दंडित होगा |
  • अगर कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अंतर्गत कोर्ट में झूटी गवाही देता है तो उसका झूट पकड़े जाने पर वह 1 वर्ष के कारावास व 5 हजार के जुर्माने से दंडित होगा |
  • यदि कोई व्यक्ति कर्मचारियों को मिलने वाली छुट या सरकारी सहायता को रोकता है या इसमें व्यधान उत्पन्न करता है | तो वह व्यक्ति 1 महीने से लेकर 6 महीने के कारावास व 5 हजार जुर्माने से दंडित होगा
  • कम्पनी को चलाने वाले संचालक या डायरेक्टर अगर कोई गलत कार्य करते है तो वे अपने पद से हटने के बाद भी उसके लिए जिम्मेदार होंगे तथा कम्पनी भी जिम्मेदार होगी |

जय हिन्द

द्वारा

अधिवक्ता धीरज कुमार

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