किराये की दुकान कैसे खाली कराये ?

किराये की दुकान और मकान कैसे खाली करवाये और क्या सावधानिया रखे ? 

आज कल, किसी की किराये की दुकान या मकान पर किरायेदार बन कर रहना और बाद में कब्ज़ा करना एक आम बात हो गई है | ऐसे लोग बाद में पैसे देकर निकलते है या फिर आपकी दुकान या सम्पति को स्वय ही  सस्ते दामो पर खरीद लेते है | ऐसे में बहुत जरूरी है की मकान मालिक समझदारी से काम ले | ऐसे लोगो से बचे व फसने पर समझदारी से अपनी सम्पति को खाली करवाये.

किराये पर सम्पति देते समय सावधानिया :-

कुछ बातो में सावधानिया और इन चीजो को ध्यान में रख कर मकान मालिक सम्पति के हरण से बच सकते है |

1. कंपनी को पहले प्राथमिकता दे :-

किराये की सम्पति, या तो किसी व्यक्ति को किराये पर दी जाती है या फिर किसी कंपनी को | व्यक्ति ही कब्ज़ा करने का प्रयास करते है | कम्पनी नही | इसलिये अगर आप के पास दोनों ही आप्शन हो, तो आप इसमें से सिर्फ कंपनी के आप्शन को ही चुने | चाहे दूकान सस्ते में ही किराये पर जा रही हो | क्योकि कंपनी लॉ एक्ट के अनुसात कंपनी बोर्ड के अपने नियम होते है और उनका वोइलेशन करने पर कंपनी को भारी जुर्माना देना पड जाता है इसलिए आप कंपनी को ही प्राथमिकता दे तो अच्छा है |

2. किराये की दुकान या किराये की सम्पति की फोटो लेना :-

मकान मालिक को चाहिए की वो अपनी किराये की सम्पति किरायेदार को सोपने से पहले उसके फोटो ले ले और उन पर किरायेदार से हस्ताक्षर भी करवा ले | ताकि कल को कोई टूट-फूट तो जाए या झगड़ा हो जाये तो वो खर्चा कोर्ट में फोटो दिखा कर आसानी से साबित करके किरायेदार से लिया जा सके |

या इसके अलावा नुक्सान होने पर कोर्ट में दिखा कर अपनी किराये की सम्पति को आसानी से खाली भी करवाया जा सकता है |

3. 11 महीने का ही अग्रीमेंट करे :-

जब भी आप अपनी किराये की सम्पति या किराये की दुकान किसी व्यक्ति को किराये पर दे | तो उससे सिर्फ 11 महीने का ही अग्रीमेंट करे | लेकिन कंपनी के साथ आप कितना भी लंम्बा अग्रीमेंट कर सकते है | 11 महीने का अग्रीमेंट इसलिए क्योकि रेंट अग्रीमेंट एक्ट के अनुसार कोई भी पक्का अग्रीमेंट कम से कम 12 महीने का होना चाहिए और वो लोकल रजिस्ट्रार से रजिस्टर्ड भी होना चाहिए | इसलिए लोग टैक्स का पैसा बचाने व कोर्ट में केस जाने पर वो केस मकान मालिक के लिए मजबूत रहे इसलिए 11 महीने का ही अग्रीमेंट करते है | क्योकि कोर्ट में किरायेदार अगर स्टे के लिए भी चला जाता है, तो, वह सबसे पहले ये बहाना बनाता है की अब उसका इस सम्पति से निजी लगाव, यादे या आर्थिक आधार जुडा हुआ है | 11 महीने का कच्चा अग्रीमेंट होने पर मकान मालिक कह सकता है की उसने तो ये अग्रीमेंट सिर्फ छोटे समय के लिए किया था तथा किरायेदार का इतने समय में कोई भी निजी लगाव या आर्थिक हानि नही जुडी है | और सरकार को भी इससे कोई टैक्स में लाभ नही मिल रहा है इस आधार पर किरायेदार को स्टे नही मिलता है | और मकान मालिक बाद में केस भी जीत जाता है |

किराये की दुकान कैसे खाली करवाये

किराये की दुकान कैसे खाली करवाये

4. 11 महीने के बाद पार्टी का नाम बदल कर अग्रीमेंट करे :-

11 महीने का अग्रीमेंट खत्म होने के बाद, जब आप अपने किरायेदार के साथ दूसरा अग्रीमेंट करे अगर हो सके तो वो अग्रीमेंट उसी किरायेदार से ना करके उसके किसी और प्यारे व्यक्ति या किसी सदस्य से करे | ताकि कोर्ट में केस होने पर ये कहा जा सके की हर बार मैंन पार्टी बदली है इसलिए किरायेदार का कोई निजी हित, यादे या आर्थिक हानि इस सम्पति से नही जुडी है | इसके अलावा भी अगर ऐसा होना सम्भव नही हो और आप को सिर्फ एक ही पार्टी के नाम से अग्रीमेंट करना पड़े तो भी आप 11 महीने ख़त्म होने के एक महीने के बाद नया अग्रीमेंट करे और इस बिच की पेमेंट / क़िस्त सिर्फ नगद ही ले | इससे ये फायदा है की आप को अगर, कब्जे के कारण कोर्ट में जाना पड़ा तो आप कह सकते है की, मेरा किरायेदार कई सालो से मेरी सम्पति पर तो किरायेदार है पर रेगुलर/लगातार नही है | बिच में उसने सम्पति को छोड़ा भी है | इसलिए उसका निजी हित, आर्थिक हानि व लगाव तो समय-समय पर भंग होता रहा है और इसका किराये की दुकान या किराये की सम्पति में कोई भी परेशानी हो तो, ये इसे पहले भी छोड़ता रहा है तो अब भी छोड़ कर चला जाये और नई सम्पति देख ले | और इस प्रकार से कोर्ट में किरायेदार द्वारा केस करना उचित नही बनता है |  लेकिन ये बात सिर्फ व्यक्ति विशेष पर लागु होती है | ना की किसी कंपनी पर | कम्पनी से आप कितना भी लंबा अग्रीमेंट कर सकते है

5. किराये की दुकान या सम्पति का अग्रीमेंट नही बनाना :-

अगर हो सके तो आप बिना अग्रीमेंट के भी अपनी सम्पति या किराये की दुकान किसी व्यक्ति को किराये पर दे सकते है | ये बात मकान मालिक के हक़ में होती है | इसका पहला फायदा ये है की, किसी भी प्रकार का झगड़ा होने पर बिना किसी अग्रीमेंट के किरायेदार को कोर्ट में जाने में परेशानी होगी | दूसरा बिना सबूत उसको कोर्ट को किराया बताने में परेशानी होगी की कितना है क्योकि अगर किरायेदार समय पर किराया नही देता है या फिर वो किराया बिलकुल नही देता है तो उसे कानूनन मकान खाली करना होता है | इसमें मकान मालिक का फायदा ये है वो कह सकता है की किरायेदार ने किराया समय पर नही दिया इसलिए मुझे अपना किराये की दुकान या मकान खाली करवाना है और किराये का सबूत नही होने के कारण, वो किराया भी ज्यादा बता सकता है |

लेकिन इसमें एक नुक्सान की बात ये है की अगर किरायेदार ज्यादा समय तक मकान में बिना अग्रीमेंट के रह जाए तो वो कुछ सालो में अपनी गलत तरीके से उस जगह की आई.डी. बनवा कर अपने नाम भी करवा सकता है | इसके लिए ऐसी स्तिथि में आप ज्यादा समय तक किरायेदार को नही रखे और साल दो साल में चलता कर दे |

6. औरत के साथ अग्रीमेंट नही करे :-

आज कल जो मुझे देखने में आ रहा है की, औरते मकान मालिक पर झूठा धारा 354 आई. पी. सी. का मुकदमा करके मकान हडप लेती है या फिर अच्छे पैसे लेकर मकान खाली करती है | उपर से सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट के बाद तो पहले महिला की अफ. आई. आर. रजिस्टर्ड होगी तथा बाद में सही गलत का फेसला होगा | ऐसे में गलत महिलाओं को होसला मिल रहा है | दूसरा नुक्सान ये है की आपको हमेशा औरत के साथ ही पैसो की डील करनी होगी | जिसमे की इल्जाम लगने के चांस ज्यादा होते है | क्योकि अग्रीमेंट उसके नाम है | तीसरा ये की अकेली औरत को मकान देने से पहले सावधानी रखे | में यहा स्टडी करने आई लडकियों के खिलाफ नही हु | सिर्फ मेरा मतलब तेज और चालक शादी शुदा औरतो से है |

7. किरायेदार का बिजली और पानी का कनेकशन नही काटे :-

ज्यादातर लोग कब्जे होने या किरायेदार से झगड़ा हो जाने की स्तिथि में किराये की सम्पति का बिजली व पानी का कनेकशन काट देते है | जो की गलत है | क्योकि ऐसी स्तिथि में किरायेदार कोर्ट चला जाएगा और कोर्ट इलेक्ट्रिसिटी और वाटर सप्लाई बोर्ड को तुरंत किरायेदार के नाम से कनेक्शन लगाने का आदेश दे देगी | ऐसा इसलिए है क्योकि बजली व पानी किसी भी व्यक्ति के जीवन जीने का आधार है और ये हक उसे सविधान के फंडामेंटल राईट आर्टिकल 21 में मिला हुआ है | तो कभी भी ये कनेकशन नही काटे बल्कि अगर किरायेदार इनका बिल नही भरे तो सीधे कोर्ट में जाए | वहा आपकी बात सुनी जाएगी तथा इस आधार पर आपका पक्ष भी मजबूत हो जायेगा |

8. झगड़े का सहारा :-

वैसे तो ज्यादातर लोग झगड़े का सहारा लेकर या गुंडों के द्वारा किराये की दुकान या किराये के मकान खाली करवाते है | ज्यादातर ये तरीका सफल भी हो जाता है लेकिन कई बार उल्टा भी पड़ जाता है | जिसमे की ये होता है की किरायेदार की पत्नी या और कोई सम्बन्धी औरत मकान मालिक या उसके बच्चो पर झूटे छेद्कानी का मुकदमा बना देती है | और फिर केस लंबा चलता है और मकान भी जल्दी खाली नही होता है | इसलिए सावधानी बरते | आयर समझदारी से से काम ले |

9. किराये की रसीद नही दे :-

मकान मालिक को चाहिए की वो अपने किराये की सम्पति की एक रसीद बुक बना कर रखे शुरुआत में तो किरायेदार को रसीद दे तथा बाद में रसीद नही दे | ताकि अगर किसी भी प्रकार का किरायेदार से झगडा होने पर मकान मालिक कोर्ट में ये कह सके की किरायेदार ने बाद में किराया नही दिया अगर कोई सबूत है तो किरायेदार पेश करे | इसलिए मुझे कोर्ट के द्वारा अपना मकान खाली चाहिए | यहां सावधानी रखने वाली बात ये है की ऐसी स्तिथि में किराया सिर्फ नगद ही ले, तभी ऐसा होना सम्भव है |

10. किराया हमेशा नगद में ले :-

अगर किरायेदार कोई व्यक्ति विशेष है तो, कभी भी किरायेदार से किसी भी प्रकार का अमाउंट अपने खाने में नही ले | ताकि कल को ये सबूत नही बन पाए की किरायेदार समय पर किराया देता था | आप हमेशा किराया नगद ही ले | और उसकी कोई रसीद नही दे | लेकिन ऐसा सिर्फ व्यक्ति विशेष के साथ ही करे किसी कंपनी के साथ नही |

11. पिछले मकान मालिक से इंक्वारी :-

जब भी आप किसी व्यक्ति विशेष को मकान किराये पर दे, तो जरुर उसके पिछले मकान मालिक से उसके बारे में पूछताछ कर ले | की किरायेदार का नेचर/स्वभाव कैसा है और वो किराया देने में कैसा व्यक्ति है  | ये बात करने में तो बड़ा अटपटा लगता है पर हो सके तो आप स्वय न करके किसी से भी जरा सी भी इंक्वारी करा ले तो अच्छा है

12. किरायेदार का पुलिस सत्यापन :-

किसी भी किरायेदार का व्यक्तिगत रूप से पुलिस सत्यापन जरूरी है जिसके ना करवाने पर जुर्माना व सजा दोनों है जिसका विवरण सी.आर.पी. सी. में दिया है | जो कोई भी आप किरायेदार रखे, उसका पुलिस सत्यापन जरुर करवा ले | ये पुलिस द्वारा फ्री होता है | इसमें आपको किरायेदार का फोटो, पहचान पत्र, सभी सदस्यों का ब्यौरा, पिछले किराये वाले मकान का पता, व स्थायी पता लिखना होता है |

नोटिस जरुर दे :-

किराये की समय अवधि समाप्त होने की स्तिथि में अगर नया किरायानामा नही बनाया गया है | आप, वहा पर किरायेदार को नोटिस जरुर दे | ऐसा करना कल को कोर्ट में जाने की स्तिथि में कानूनन आपके हक में होगा | इसमें कोई देरी नही करे |

डर :-

किरायेदार के सामने कभी भी मकान मालिक को अपने आपको कमजोर नही दिखाना चाहिए और ना ही अपनी कोई कमजोरी बतानी चाहिए | जिससे की वो इसका फायदा उठा कर आपको लुट सके |

कब्जा होने की स्तिथि में क्या करे

1. लड़ाई झगड़ा, परेशान करना या दबाव :-

किसी और प्रकार की किराये की सम्पति पर कब्जा हो जाने की स्तिथि में मकान मालिक किरायेदार को परेशान करके पीटकर या फिर उसके परिवार को कोई तकलीफ देकर मकान खाली करवाते है | कई बार किराये की सम्पति खाली हो भी जाती है और कई बार ये चीजे उल्टा मकान मालिक के गले में भी पड़ जाती है | इसलिए ऐसे मामलो में समझदारी से काम ले | स्वय ऐसी चीजो से दूर रहना चाहिए और ऐसे झगड़े किसी दुसरे लोगो के झगड़े दिखने चाहिए | (में यहा किसी भी प्रकार की लड़ाई या दबाव का समर्थन नही करता हु )

2. पुलिस द्वारा परेशान करना या केस करना :-

किराये की सम्पति पर कब्जा हो जाने की स्तिथि में मकान मालिक, किरायेदार को लोकल पुलिस की सहायता से धमकवाते है या फिर झूटे केस में फसाने की धमकी दिलवाते है | या किसी भी प्रकार का समाजिक दबाव भी बनाने का प्रयत्न करते है कई बार इसमें उन्हें कामयाबी भी मिल जाती है और नाकामी भी | में इन चीजो का समर्थन नही करता हु | दबाव बनाना गलत बात नही है लेकिन उसका तरीका सही हो |

3. गैर क़ानूनी कार्यवाही :-

मकान मालिक को चाहिए की उसकी किराये की दुकान या किराये की सम्पति पर कब्जा होने स्तिथि में अगर आपका किरायेदार गलत कब्जा करता है तो आप भी अपने किरायेदार पर र्गैर क़ानूनी कार्य करने का कोई केस या आरोप लगाये जैसे की कोई लडकी बाजी का काम या कोई और प्रतिबंधित कार्य में स्न्ग्लित होना इत्यादि

4. कोर्ट में केस :-

अंत में कुछ ना हो सके तो कोर्ट ही जाने का रास्ता बचता है | लेकिन कोर्ट में समय ज्यादा लगता है इसलिए कोर्ट जाने से बचे क्योकि अभी रेंट कंट्रोल एक्ट मकान मालिक के लिए मजबूत नही है | जब तक इसमें कोई अच्छा संसोधन नही हो जाता है तब तक मकान मालिक को ऐसे ही परेशान होना होगा

कोर्ट केस चलने तक किराया लेने का हक कोर्ट अपने हाथ में रखता है तथा किराये से सम्बन्धित कोई झगड़ा नही होने किस स्तिथि में किराया मकान मालिक को देता है वरना अपने पास जमा रखता है | ऐसी स्तिथि में केस लंबे चलते है | किराये की दुकान या किराये की सम्पति ऐसे ही अटकी रहती है

उपर लिखी बातो व सावधानियो का पर ध्यान दे  और उन्हें अपनाये |

जय हिन्द

ज्यादा अच्छी जानकारी के लिए इस नंबर 9278134222 पर कॉल करके  online advice ले advice fees  will be applicable.

द्वारा

ADVOCATE DHEERAJ KUMAR

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