MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा

प्रशन :- वकील साहब MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा कैसे ले अगर किसी व्यक्ति की मोटर एक्सीडेंट में मिर्तु हो जाये तो उस व्यक्ति को कोर्ट से मुवावजा कैसे और किस आधार पर कितना ज्यादा मिल सकता है | <h1><h2>

      उत्तर :- दुर्घटना के प्रकार :- MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा सिर्फ उस व्यक्ति को मिल सकता है जिस की दुर्घटना किसी  व्हीकल से  हुई है और वह व्हीकल मोटर व्हीकल act के अन्तेर्गत रजिस्टर्ड हो मतलब की उसका एक नंबर हो | इसमे कोई साइकल या बेटरी से चलने वाले अन-रजिस्टर्ड व्हीकल नही आते है |MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा लेना कोई मुसकिल काम नही है अब कोर्ट ने इसका प्रोसीजर बहुत आसान बना दिया है

  • दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति के अधिकार :- दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति कोर्ट में केस डाल कर कोर्ट से मुआवजा ले सकता है | तथा दोषी व्यक्ति को सजा करवा सकता है |
  • दुर्घटना में मुत्यु होने पर अधिकार :- दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति की मर्तु होने की स्तिथि में उसके परिजन मतलब legal heirs कोर्ट में केस डाल कर कोर्ट से मुआवजा ले सकते है legal heirs में उस व्यक्ति के माता-पिता, पत्नी/पति, बच्चे तथा इनके न होने पर भाई शामिल है |
  • सबसे पहले किससे सम्पर्क करे :- सबसे पहले दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति को 100 न. पर पुलिस को सूचित करना चाहिए तथा दोषी व्यक्ति के खिलाफ उसके व्हीकल न. के साथ शिकायत करनी चाहिए (पुलिस में शिकायत कैसे लिखनी चाहिए इसके लिए मेरी दुसरी पोस्ट देखे ) | इसके बाद अमुक दोषी व्यक्ति पर F.I.R. रजिस्टर्ड करवा कर M.A.C.T. कोर्ट में केस फाइल करना चाहिए| वैसे Delhi में तो पुलिस स्वय ही शिकायतकर्ता की तरफ से M.A.C.T. कोर्ट में केस फाइल कर देती है बाकि राज्यों का मुझे पता नही |
MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा

MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा

(बिना F.I.R. रजिस्टर्ड के भी MACT मोटर दुर्घटना केस मे कोर्ट से मुआवजा लिया जा सकता है पर वह बहुत बड़ा  हो जायेगा में उसका जिक्र यहा नही कर रहा हु|)

  • दुर्घटना में मुत्यु होने की स्तिथि में :- ऐसी स्तिथि में उस व्यक्ति के परिजन या / legal heirs पुलिस में शिकायत कर के F.I.R. रजिस्टर्ड करवा सकते है | और M.A.C.T. कोर्ट में केस भी फाइल कर सकते है |
  • MACT मोटर दुर्घटना मे कोर्ट मे केस किसके खिलाफ फाइल करे :- MACT  कोर्ट में सेशन जज के पास धारा 166,140 M.A.C.T. act में केस स्वय या अपने वकील साहब के द्वारा फाइल करे इसमे सबसे पहले दोषी व्हीकल को चलाने वाले ड्राईवर को पार्टी बनाये फिर दुसरे नंबर पर दोषी व्हीकल के मालिक को तथा तीसरे नंबर पर इन्सोरंस कंपनी को |
  • MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा मे पुलिस की भूमिका :- पुलिस का कार्य  F. I.R. रजिस्टर्ड करके दोषी के खिलाफ कोर्ट में केस फाइल करना है | तथा झुटा केस पाने पर cancellation report file करना है | जिसमें F.I.R. खतम हो जाती है तथा मुआवजा नही मिलता है |
  • अदालत से अपेक्छा :-  MACT मोटर दुर्घटना केस मामले में दो केस बनते है एक तो  F.I.R. रजिस्टर्ड वाला जो की मजिस्ट्रेट के पास चलता है जो i.p.c. act की धारा 279 में 6 महीने की सजा व 1000 रूपए तक जुरमाना और 337 में 6 महीने की सजा व 500 रूपए तक जुरमाना या कोई भी अलग धारा हालात के हिसाब से हो सकती है में चलता है जिसमे दोषी को जुरमाना व जेल होती है तथा दूसरा केस वो है जो की M.A.C.T. कोर्ट में सेशन जज के पास धारा 166,140 MACT act में चलता है और मुआवजा या छतिपूर्ति के लिए दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति के द्वारा या उसके legal heirs द्वारा (delhi में पुलिस द्वारा) डाला जाता है | ऐसे में कोर्ट दोनों पक्षों की गवाही सुन कर मुआवजा देना है या नही व कितना देना है ऐसा फेसला सुनाती है |
  •  मध्यस्ता केंद्र की भूमिका :-  अगर magistrate के समक्ष केस में दोनो पक्ष समझोता करके F. I.R. के केस  को ख़तम कर सकते है इसमे पीड़ित पक्ष दोषी से मुआवजा भी ले सकता है तथा session judge M.A.C.T. कोर्ट के समक्ष केस को हम इन्सोरंस कंपनी से मुआवजे की बात करके भी कम समय में खतम कर सकते है |
  • MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा और मुआवजे का आधार :- छतिपूर्ति इस आधार पर दि जाती है की दुर्घटना ग्रस्त व्यती को कितनी चोट लगी है व उसकी कमाई का कितना नुकशान हुआ है | तथा मुर्त्यु/ death के केस में उस व्यक्ति की उम्र उस पर आशिर्त व्यक्तियों की संख्या व उस की इनकम को ध्यान में रख कर मुआवजा दिया जाता है |

अगर किसी व्यक्ति की मोटर दुर्घटना में accidental death होती है और वह व्यक्ति पिछले तीन साल से लगातार इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल कर रहा था तो उसकी पिछले तीन साल की एवरेज सालाना इनकम की दस गुना राशि उस व्यक्ति के परिवार को देने के लिए सरकार बाध्य है ।

जी हाँ , आपको आश्चर्य हो रहा होगा यह सुनकर लेकिन यह बिलकुल सही है यह सरकारी नियम है। उदहारण के तौर पर अगर किसी की सालाना आय क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे साल तीन लाख, चार लाख और पांच लाख है तो उसकी आय पांच लाख का दस गुना मतलब 50 लाख रूपए उस व्यक्ति के परिवार को सरकार से मिलने का हक़ है। लेकिन अगर उस व्यक्ति की इनकम घट जाती है जैसे की पहले साल तीन लाख दुसरे साल पांच  लाख  व तीसरे साल चार लाख हो जाती है तो ऐसी स्तिथि में इनकम घटने की दशा में उस व्यक्ति की औसत इनकम निकल कर जो की चार लाख होती है के अनुसार 40 लाख मिलेंगे |

नोट :- ज्यादा टैक्स रिटर्न होने की स्तिथि में हमेशा आखरी तीन साल की टैक्स रिटर्न इनकम ही गिनी जाएगी |

ज़्यादातर लोग जानकारी के अभाव में यह क्लेम सरकार से नहीं लेते हैं । अगर लगातार तीन साल तक रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो ऐसा नहीं है कि परिवार को पैसा नहीं मिलेगा लेकिन ऐसे केस में सरकार एक डेढ़ लाख देकर किनारा कर लेती है लेकिन अगर तीन साल तक लगातार रिटर्न फ़ाइल किया गया है तो ऐसी स्थिति में केस ज़्यादा मजबूत होता है और यह माना जाता है कि मरने वाला व्यक्ति अपने परिवार का रेगुलर अर्नर था और अगर वह जिन्दा रहता तो अपने परिवार के लिए अगले दस सालो में वर्तमान आय का दस गुना तो कमाता ही जिससे वह अपने परिवार का अच्छी तरह से पालन पोषण कर पाता ।

सर्विस वाले लोग रेगुलर अर्नर हैं लेकिन बहुत से लोग रिटर्न फ़ाइल नहीं करते हैं जिसकी वजह से न तो कंपनी द्वारा काटा हुआ पैसा सरकार से वापस लेते हैं और न ही इस प्रकार से मिलने वाले लाभ का हिस्सा बन पाते हैं । इसलिए इनकम टैक्स रिटर्न हर वर्ष अवश्य फ़ाइल करें ।

  • दोषी व्यक्ति के पास valid licence ना होने व दोषी व्हीकल का इन्सोरंस ना होने की स्तिथि में छतिपूर्ति :- अगर दोषी व्यक्ति के पास valid licence नही है तो उस दोषी व्यक्ति को और व्हीकल के मालिक को MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा अपनी जेब से देना होगा | ऐसी स्तिथि में इन्सोरंस कंपनी छतिपूर्ति नही देगी | तथा सिर्फ व्हीकल का इन्सोरंस न होने की स्तिथि में व्हीकल का मालिक ही मुआवजा देगा| (ऐसी स्तिथि में भी इन्सोरंस कंपनी से छतिपूर्ति लेकर केस को ख़तम किया जा सकता है पर माफ़ कीजियेगा ये मेटर ज्यादा बड़ा होने के कारण में यह उसका विवरण यहा नही दे सकूंगा)
  • दोषी व्यक्ति के अधिकार व बचाव :- दोषी व्यक्ति के खिलाफ साधारणत: i. p.c. act की धारा 279 और 337 में केस दर्ज किया जाता है जो की एक जमानतय धारा में आता है इस केस में पुलिस स्टेशन से ही जमानत हो जाती है कोर्ट में जाने की जरूरत नही होती है पर कई राज्यों में कोर्ट में ही जमानत होती है | इन धाराओ में 279 में 6 महीने की सजा व 1000 रूपए  तक जुरमाना और 337 में 6 महीने की सजा व 500 रूपए का जुरमाना होता है |

तथा दूसरा केस जो की M.A.C.T. कोर्ट में सेशन जज के पास धारा 166,140 M.A.C.T. act में चलता है उसमे जमानत की जरूरत नही होती है वह सिविल केस की तरह ही होता है |

MACT मोटर दुर्घटना केस मे मुआवजा देने से कैसे बचे व दोषी कैसे केस जीते :- दोषी व्यक्ति को कोर्ट में यह साबित करना चाहिए की गलती शिकायतकर्ता की थी तथा वह सही तरीके से ड्राइविंग कर रहा था सही था तथा उसके पास दुर्घटना वाले दिन valid licence व इन्सोरंस था | दोषी व्यक्ति को शिकायत कर्ता से उस समय, जगह व आप पास की चीजो के बारे में पूछ कर भ्रमित करना चाहिए| दोषी व्यक्ति अपने बचाव में गवाह भी ला सकता है |

    (आप लोगो से मेरा निवेदन है की valid licence व इन्सोरंस करवा कर ही व्हीकल चलाये)

      भगवन आप लोगो को दुर्घटना से बचाए |

      जय हिन्द

दुवरा

अधिवक्ता धीरज कुमार

इन्हे भी  जाने

 

इन्हे भी  जाने

हेल्थ से जुड़े टिप्स जानने के लिए क्लिक करे नीचे दी गई इमेज पर |

https://www.healthbeautytips.co.in/

https://www.healthbeautytips.co.in/

Share on Social Media
  • 99
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

292 Comments

  1. DHËērÃj
  2. sailesh
  3. Deepankar srivastava
    • sailesh
  4. mohit
  5. Ajay hooda
  6. Sudhanshu kumar
  7. Manoj
  8. Ajay
  9. Hanuman Singh
  10. Sjiv
  11. Samir khunte
  12. Samir khunte
  13. Raj
  14. Raj
  15. Raj
  16. Raj
  17. Braj gurjar
  18. Vijay kumar
  19. Subhash Chander
  20. Manish
  21. Vivek Srivastava
  22. Vk
  23. Atul
  24. Anuj Kumar
  25. Sem
  26. Rajveer singh
  27. Vakar
  28. Amit kumar
  29. Sachin
  30. Sandeep kumar
  31. शशिकांत पटेल
    • Anshu
  32. Binay
    • Kishor
  33. Pritam singh
    • Kishor
  34. राहुल यादव
  35. damanpreet kaur
  36. इमरान कुरेशी
  37. Ajay
  38. Puneet
  39. Kishor
    • Kishor
  40. Rakeah
  41. Rakesh Kumar
  42. Abhinav Kumar
  43. Harendra
  44. Shabnam
  45. Rohit Yadav
    • प्रतीश बाफना
  46. Monia YADAV
  47. Sandeep kumar
  48. Asish
  49. Jivan
  50. Aashish
  51. Shekhar
  52. Jitendra kumar airwal
    • Kishor
  53. Rohit vishwakarma
  54. amrish kumar
  55. ravi kumar
  56. sanjay
  57. Ajay
  58. amrish
  59. amrish
  60. asif
  61. asif
  62. नरेन्दृ कुमार बैरवा
  63. Jay prakash kumar
  64. Vijay
  65. Ravi binjhwar
  66. Suresh
  67. rahul tiwari
  68. Hemant
  69. rahul tiwari
  70. Neeraj
  71. Ramesh Sharma
  72. Ramesh
  73. Kuldeep
  74. Kuldeep
  75. Ajay
  76. Chintan rathod
  77. Dasharath
  78. Lokendra Singh Shaktawat
  79. Simran
  80. kamal
  81. Raju
  82. Amit kumar
  83. Samir
  84. Sandeep
  85. Deepak rajpoot
  86. Roshan Patel
  87. ARBIND KUMAR SUMAN
    • yogesh sham Sonawane
  88. Aashish
  89. Shafique ali
  90. Maan
  91. Chhaya
  92. Zafar
  93. Krishan
  94. RAKESH GEHLOT
  95. Sushil
  96. niharika
  97. अजित यादव
  98. Ajit yadav
  99. रविंद्र
  100. sunil
  101. Amrender Yadav
  102. MukeshBaria
  103. Manoj kumar
  104. Rahul
    • Suman Bansal
  105. Anil
  106. Deenanath dubey
    • Ajay parmar
    • Prakash Kumar

Leave a Reply

Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.