जाने झूटे चेक बाउंस केस धारा 138 N.I. एक्ट केस कैसे जीते

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प्रशन :- वकील साहब धारा 138 N.I. एक्ट, चेक बाउंस का केस कैसे फ़ाइल् करे व कैसे जीते, कोर्ट व पुलिस का इसमें क्या रोल होता है 

 उतर :- चेक की परिभाषा क्या है :-

चेक एक प्रकार का रूपए की तरह नोट होता है जैसे की किसी चेक पर दो हजार का अमाउंट लिखा है तो वह चेक एक प्रकार से दो हजार रूपए का नोट ही है जब आप उस चेक को बैंक में कैश के लिए डालते है और वो बाउंस हो जाता है तो इसका मतलब क़ानूनी भाषा में ये माना जाता है की सामने वाले ने आपको फर्जी दो हजार रूपए दिए थे | तथा आप क़ानूनी रूप से उससे वो दो हज़ार रूपए लेने के हकदार है और इसी के आधार पर भारत सरकार ने 138 N.I. एक्ट का निर्माण किया है

धारा 138 N.I. एक्ट चेक बाउंस का केस कैसे फ़ाइल् करे :-

कोई भी केस फ़ाइल् करने के लिए चेक का बाउंस होना बहुत जरूरी होता है वो चेक अकाउंट व सेल्फ दोनों में से किसी भी प्रकार के बाउंस हो सकता है चेक के बाउंस होने के बाद आपके पास सामने वाले से लड़ने के लिए तीन क़ानूनी आधार रह जाते है (1) चेक बाउंस N.I.138 एक्ट का केस फ़ाइल् कर सकते है (2) आप दीवानी मुकदमा यानि सिविल केस आर्डर 37 C.P.C. में फ़ाइल् कर सकते है (3) आप पुलिस में शिकायत कर के धारा 420 में भी फ. आई. आर. करवा सकते है | आइये एन तीनो पर खुल कर चर्चा करे की हम कैसे इनका प्रयोग कर सकते है |

1.   धारा 138 N.I. एक्ट का केस कैसे फ़ाइल् करे :-

किसी भी चेक के केस को फ़ाइल् करने के लिए उस चेक का बाउंस होना जरूरी है आइये इसके स्टेप जाने

चेक को बैंक में डालने की समय सीमा :-

आप किसी भी चेक को उस पर लिखी तारीख के 3 महीने के अंदर ही आप बैंक में कैश के लिए डाल सकते है इसके बाद वो चेक मान्य नही होगा |

चेक बाउंस होने पर पहले आप अपने अकाउंट में चेक जमा करते समय जो स्लिप फिल की थी उसकी कॉपी सुरक्षित रखे व बैंक से जो बोउन्सिंग स्लिप मिलती है वो बैंक की स्टाम्प व सिग्नेचर के साथ ले ताकि केस फाईलिंग के बाद कोर्ट में इसे सच्चा साबित करने की जरूरत नही पड़े |

लीगल नोटिस :-

चेक के बाउंस होने के बाद आप को चेक बाउंस होने के 30 दिनों के अंदर दोषी पार्टी को लीगल नोटिस देना होता है आप स्वय या अपने वकील साहब के द्वारा दोषी पार्टी  को लीगल नोटिस भेज सकते है ये लीगल नोटिस स्पीड पोस्ट या कुरियर सर्विस से भी भेजा जा सकता है नोटिस में आप को लिखना होता है की ये चेक आपने कब और क्यों लिया था तथा उस पर लिखे पैसे देने की जिम्मेदारी दोषी पार्टी की ही है | इसके अलावा अंत में आप उस से चेक के अमाउंट को नोटिस मिलने के बाद 15 दिन में लोटाने व इसके अलावा अपने भेजे गये लीगल नोटिस का खर्चा भी मांग सकते है |

केस फ़ाइल् करना :-

लीगल नोटिस भेजने के बाद जिस दिन को वो नोटिस दोषी पार्टी को मिलता है या बिना मिले आप के पास वापस लोट आता है उस दिन से अगले 15 दिन आप के पास अपने पैसे मिलने के इंतजार के होते है व इसके बाद से अगले 30 दिनों के बीच आपको कोर्ट में केस फ़ाइल् करना होता है  यानि की आपके पास कुल 45 दिन होते है जिनमे से आखरी 30 दिन केस फ़ाइल् करने के होते है |

डाक्यूमेंट्स जो केस के साथ फ़ाइल् करने है :-

केस फ़ाइल् करते समय आप इन डाक्यूमेंट्स को केस में लगाये (1) आपका चेक (2) चेक को बैंक में डालने के समय भरी स्लिप (3) चेक की बोउन्सिंग स्लिप (बैंक की स्टाम्प व सिग्नेचर के साथ) (4) लीगल नोटिस तथा उसकी पोस्टल स्लिप सबूत के साथ की आपका नोटिस दोषी पार्टी को मिला था अगर नही मिला तो उस के कारण क्या थे (5) अगर आपके लीगल नोटिस का कोई जवाब आपको मिला है तो उसका रिप्लाई (6) इसके अलावा कोई अग्रीमेंट आपके बीच हुआ है या इस लेनदेन के सम्बन्धित कोई दस्तावेज इत्यादि |

गवाह किसे बनाये :-

(1) अपने बैंक को मेनेजर द्वारा ये साबित करने के लिए की आपका चेक बाउंस हुआ था  (2) दोषी पार्टी के बैंक को ये साबित करने के लिए की बोउन्सिंग के कारण जो हमारे बैंक ने दिए थे वे सही है (3) आपने जो लीगल नोटस दिया है उस पोस्ट ऑफिस या कुरियर सर्विस को (4) अगर इस का कोई गवाह है तो आप उस का भी नाम डाले

इसके अलावा आपको इसमें एक एविडेंस बाई दा अफिड़ेविट भी देना होता है इसमें आप केस के सारे फैक्ट दुबारा लिखते है तथा दिए गये सरे डाक्यूमेंट्स को अक्जिबिट करते हो |

इस तरह आप का केस फ़ाइल् हो जाता है

2.दीवानी मुकदमा यानि सिविल केस आर्डर 37 C.P.C. :-

चेक बाउंस होने के बाद आप चाहे तो दोषी पार्टी पर सिविल भी फ़ाइल् कर सकते है ये केस सिर्फ 4 तारीखों में ही खत्म हो जाता है और कोर्ट आपको आपका पैसा ब्याज समेत आपको दिलवाता है लेकिन इसमे आपको अपने चेक के अमाउंट के हिसाब से कोर्ट फीस देनी होती है जो की ज्यादा होती है वैसे ये फीस आपको केस जितने पर वापस मिल जाती है लेकिन लोग इस फीस मे पैसे न लगाने के कारण इस केस को कम ही डालते है | ये केस आप चेक बाउंस होने की तारीख से अगले 3 साल में कभी भी कर सकते है

3. पुलिस फ. आई. आर. द्वारा :-

आप चाहे तो दोषी के खिलाफ धारा 420 में फ. आई. आर. करवा सकते हो लेकिन पुलिस ऐसे मामलो   में जल्दी फ. आई. आर. करती नही है तथा चेक बौंसिंग केस डालने को ही कहती है लेकिन आप दोषी पार्टी पर दबाव बनाने के लिए कोर्ट में फ. आई. आर. के लिए जा सकते हो |

धारा 138 N.I. एक्ट का केस कहा फ़ाइल् करे  :-

जिस बैंक में चेक बाउंस हुआ है उस बैंक के पुलिस स्टेशन के क्षेत्राधिकार वाले कोर्ट में केस फाइल करे |

धारा 138 N.I. एक्ट में सजा :-

इस धारा में दोषी को 2 वर्ष तक का कारावास व चेक के अमाउंट का दुगना और शिकायतकर्ता को देना हो सकता है , वैसे कोर्ट चाहे तो जुर्माना भी लगा देती है

 धारा 138 N.I. एक्ट में जमानत कैसे ले  :- 

ये जमानती अपराध है इसमें कोर्ट से ही जमानत मिल जाती है | कोई परेशानी नही आती है |

धारा 138 N.I. एक्ट में पुलिस का रोल :-

पुलिस चाहे तो धारा 420 IPC में फ. आई. आर. कर सकती है पर करती नही है  अगर कोर्ट से फ. आई. आर.  के आर्डर हो जाये तो फ. आई. आर. रजिस्टर्ड करके दोषी को जेल में डाल सकती है तथा पुलिस कोर्ट के वारंट आर्डर पर भी दोषी को गिरफ्तार करती है| अगर आरोपी पर कई लोगो के चेक के केस है या फिर चेक के साथ कोई और भी धोखा धडी की है तो धारा 420 IPC में फ. आई. आर. जरुर करवाये

शिकायतकर्ता केस कैसे जीते :-

# केस में केस जितने के लिए ये साबित करना जरूरी है की आपकी लेनदारी दोषी पार्टी से बनती थी तथा इसके लिए ही उसने आपको चेक दिया

# दोषी की गलत नियत थी इसलिए चेक बाउंस हुआ व उसके अकाउंट में पैसा नही था ये उसकी गलत नियत का ही परिणाम था ऐसा साबित करे |

# आप ने दोषी पार्टी को कोई समान या पैसा दिया था तभी आपको चेक मिला उस लेनदेन का सबूत भी कोर्ट में पेश करे |

# आपके गवाह जो उस समय मोजूद थे |

दोषी झुटा केस कैसे जीते :-

# ये साबित करे की ये चेक एक सिकोर्टी चेक था

# आपने शिकायतकर्ता को चेक नही दिया था बल्कि किसी दुसरे को या उसके किसी अपने को दिया था इस चेक का मिसयूज हुआ है  (चेक पर नाम स्वय नाम ना लिखने की स्तिथि में)

# आप ने चेक गुम होने की शिकायत पुलिस में दी थी

# इस बात पर जोर दे की शिकायतकर्ता जो पैसा मांग रहा है | क्या वो पैसा टैक्स पे था अगर नही तो वो बलैक मनी था | ब्लैक मनी की रिकवरी कोर्ट नही करवा सकती है इसके लिए काफी जजमेंट है

धारा 138 N.I. एक्ट में सावधानिया :-

(1) अगर आप किसी कंपनी के खिलाफ केस डाल रहे है तो धारा 138 के साथ 142 N.I. एक्ट भी लगाये ये धारा कंपनी को दोषी बनाती है

(2) अगर दोषी पार्टी कोई कंपनी है और कंपनी के आधार पर किसी व्यक्ति ने चेक आपको दिया है तो आपको ये जरूरी है की पहली पार्टी आप कंपनी को बनाये तथा दूसरी पार्टी चेक देने वाले व्यक्ति की पोस्ट को इसमें पोस्ट लिखने के बाद आप उस व्यक्ति का नाम भी लिख सकते है यह गलती से भी पहले किसी व्यक्ति का नाम नही लिखे पहली पार्टी सिर्फ कंपनी फिर दूसरी पार्टी चेक देने वाले की पोस्ट उसकी पोस्ट लिखने के बाद उसका नाम |

(3) कई लोग सोचते है की चेक को कई बार बाउंस करवाने से केस ज्यादा मजबूत होता है ये गलत सोच है चेक का एक बार बाउंस होना ही काफी है

(4) अगर आपके चेक पोस्ट डेटेड है यानि की उस पर डेट नही है तो आप केस में ये कभी नही कहे की मेने ये तारीख दोषी की अनुपस्तिथि में लिखी थी हमेशा ये ही कहे की दोषी ने स्वय या उस के सामने मेने ये तारीख लिखी थी

(4) अगर आप चेक को बाउंस की धारा 138 N. I. एक्ट में किसी कारण वश कोई स्टेप टाइम पर पूरा नही पाये जैसे की समय पर लीगल नोटिस भेजना या समय पर केस कोउर्त्र में फ़ाइल् करना तो उसके लिए आप कोर्ट में धारा 5 लिमिटेशन एक्ट में एप्लीकेशन लगा कर उस समय को कवर कर सकते हो

(5) अगर आप किसी कारण वश चेक बाउंस का केस नही फ़ाइल् कर पाए तो कोई बात नही आप दीवानी मुकदमा यानि सिविल केस आर्डर 37 C.P.C. में फ़ाइल् कर सकते है इस को फ़ाइल् करने की समय सीमा चेक बाउंस होने से अगले 3 साल तक है

जय हिन्द

द्वारा

अधिवक्ता धीरज कुमार

नोट :-किसी भी प्रकार की online क़ानूनी सलाह के लिए इस नंबर  9278134222 पर सम्पर्क करे advice fees will be applicable.

इन्हें भी जाने :-

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