मेंटेनेंस कितने प्रकार से लिया जा सकता है ?

मेंटेनेंस क्या होता है ? ये कितने प्रकार का होता है ? किन धाराओं व कानूनों में इसका विवरण है ? क्रपया इसके बारे में विस्तार से बताये ?

हाई लाइट्स :-

मेंटेनेंस क्या है, ये कितने प्रकार का होता है ?
कानून की किन धाराओं के अंतर्गत मेंटेनेंस लिया जा सकता है
धारा 125CRPC / धारा 12 घरेलू हिंसा एक्ट
धारा 24 हिन्दू मैरिज एक्ट / सीनियर सिटीजन एक्ट ?
कौन लोग मेंटेनेंस ले सकते है और कौन नही ?
कोर्ट कितना खर्चा फिक्स कर सकती है ?
पुलिस का रोल और जमानत ?
खर्चा कैसे बडवाये ?
तलाक शुदा कैसे मेंटेनेंस ले ?

मेंटेनेंस यानि गुजारा भत्ता एक कानून है इसमें वे व्यक्ति जो की अपनी आजीविका चलाने में असमर्थ है अपने अभिभावक से गुजारा भत्ता लेते है | इसमें पत्नी अपने पति से, बच्चे अपने पिता से, तथा वर्द्ध माता पिता अपने बेटे से, व पति अपनी पत्नी से भी गुजारा भत्ता ले सकते है |

मेंटेनेंस किन प्रकार से लिया जा सकता है

मेंटेनेंस किन प्रकार से लिया जा सकता है

मेंटेनेंस के प्रकार :-

मेंटेनेंस तीन प्रकार का होता है (1) ऐड मेंटेनेंस (2) एंट्रिम मेंटेनेंस (3) मेंटनेंस

ऐड मेंटेनेंस :-

ऐड मेंटेनेंस वो गुजारा भत्ता है जो की कोई भी केस डालने के बाद उसकी पहली या दूसरी सुनवाई पर ही बिना किसी बड़ी बहस के, केस का रिप्लाई लिये या सुने बिना कोर्ट द्वारा बांध दिया जाए जैसे की कोई पत्नी अपने पति पर मेंटेनेंस का केस करती है और कोर्ट में पति के पेश होने पर कहती है की उसके पास किसी भी प्रकार का आजीविका का कोई साधन नही है वो बहुत परेशान है तो कोर्ट बिना किसी सुनवाई के एंट्रिम मेंटेनेंस या मेंटेनेंस के बंधने से पहले ही पति को ऐड मेंटेनेंस देने का आदेश पारित कर देता है | वैसे कोर्ट की ये पॉवर बड़ी अटपटी सी है लेकिन हर कोर्ट को वो चाहे सेशन हो या महिला कोर्ट सभी को इसकी पॉवर है } और इस आदेश की कोई revision भी नही फाईल हो सकती है | वैसे जज अपने इस अधिकार का कम ही उपयोग करते है |

एंट्रिम मेंटेनेंस :-

कोई भी केस जिसमे एंट्रिम मेंटेनेंस बंधना हो उसमे एक एप्लीकेशन ऐसी भी लगाई जाती है जो की कहती है की हमारे यहा केस बहुत लम्बे चलते है और केस के आखिरी में जो भी फैसला होता रहे लेकिन उसे केस चलते रहने और केस में जजमेंट आने तक कुछ एंट्रिम मेंटेनेंस बांध दिया जाये ताकि उसका गुजारा चल सके | तब कोर्ट उस एप्लीकेशन पर दोनों पक्षों को सुन कर अगर सही लगे तो शिकायतकर्ता के लिए कुछ मेंटेनेंस बांध देती है जोकि केस के जजमेंट आने तक चलता रहता है | आप इसके लिए इस आदेश के खिलाफ उपर की कोर्ट में revision फाइल कर सकते है |

मेंटेनेंस :-

ये मेंटेनेंस वो है, जो की केस के अंत में जजमेंट के साथ निर्धारित होता है की विरोधी पार्टी द्वारा शिकायतकर्ता को दिया जाये या नही | इसीके लिए केस फाइल किया जाता है |

कानून की किन धाराओं के अंतर्गत मेंटेनेंस लिया जा सकता है ?

सी. आर. पी. सी. की धारा 125 के अंतर्गत मेंटेनेंस :-

धारा 125 सी.आर.पी.सी. के अंतर्गत हर वो साधन सम्पन्न पुरुष या महिला जो की, किसी दुसरे का खर्चा वहन करने में समर्थ हो वो इन लोगो को मासिक भत्ता देगा – अपनी पत्नी को, जो बेरोजगार हो तथा छोटे बच्चो के कारण या फिर अन्य कारणों से अपना खर्चा वहन करने में असमर्थ हो

  • पति अपनी पत्नी को , मुस्लिम होने की स्तिथि में, उसकी सभी चारो क़ानूनी पत्नियो को मेंटेनेंस देगा |
  • पत्नी अपने लाचार पति को जो की कमाने में असमर्थ हो गुजारा भत्ता देगी |
  • माता और पिता अपने नाबालिक बच्चे को, जो (वैध व अवैध संतान) जो खर्चा करने में असमर्थ हो | (अपने लीगल हेयर के द्वारा) गुजारा भत्ता देंगे |
  • माता और पिता अपने नाबालिक बच्चे को, जो (वैध व अवैध संतान) {जिसमे विवाहित पुत्री सामिल नहीं है} जो शाररिक व मानसिक रूप से स्वय का खर्चा करने में असमर्थ हो (अपने लीगल हेयर के द्वारा) गुजारा भत्ता देंगे |
  • माता और पिता अपनी नाबालिक विवाहित बेटी को, जिसका पति पैसा कमाने में समर्थ नही है (अपने लीगल हेयर के द्वारा) गुजारा भत्ता देंगे |
  • पिता अपनी बालिक कुआरी बेटी को, जिसकी शादी नही हुई हो (जब तक बेटी की शादी नही हो जाती वह अपने पिता से खर्चा ले सकती है)
  • माता पिता अपने विवाहित, नाबालिक बेटे को मेंटेनेंस देंगे |
  • माता और पिता अपने गोद लिए हुए नाबालिक बच्चे को गुजारा भत्ता देंगे |
  • बेटा और बेटी अपने माता पिता को, जो वर्द्ध या लाचार हो तथा जिनका कमाई का कोई साधन नही हो या फिर उनकी कमाई बहुत कम हो को गुजारा भत्ता देंगे |

धारा 125 CRPC के अंतर्गत कौन लोग खर्चा नही ले सकते है :-

धारा 125 सी.आर.पी.सी. के अंतर्गत ये लोग, जो व्यक्ति के खर्चा देने के समर्थ होने के बावजूद, भी इससे खर्चा नही ले सकते है |

  • हिन्दू पति होने की स्तिथि में, पहली पत्नी के रहते दूसरी पत्नी खर्चा नही ले सकती है |
  • चरित्रहीन पत्नी , जो पराये पुरुष के सम्पर्क में रहती हो गुजारा भत्ता नही ले सकती है |
  • अपनी मर्जी से, बिना किसी तर्क संगत कारण के अलग रहने वाली पत्नी अपने पति से गुजारा भत्ता नही ले सकती है |
  • पति के साथ सहमती बनने के बाद, अलग रहने वाली पत्नी अपने पति से मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • खर्चा बधने के बाद, अपने पति को छोड़कर अपनी मर्जी से अगल रहने वाली पत्नी अपने पति से मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • बालिक विवाहित बेटी और बालिक बेटा अपने माता पिता से गुजारा भत्ता नही ले सकते है |

घरेलू हिंसा / डोमेस्टिक वोइलांस केस की धारा 12 के अंतर्गत मेंटेनेंस :-

इस धारा के अंतर्गत हर वो महिला जिस पर किसी महिला या पुरुष ने इस एक्ट के अंतर्गत घरेलू हिंसा की है वो अपने लिए व अपने आश्रित के लिए गुजारा भत्ता ले सकती है |

  • पत्नी अपने पति से मेंटेनेंस ले सकती है | वो चाहे किसी भी धर्म की हो |
  • पत्नी अपने नाबालिक बच्चो के लिए (गोद लिए बच्चे भी सामिल है) भी इस एक्ट के अंतर्गत अपने पति से गुजारा भत्ता ले सकती है |
  • माता अपने बेटे या बेटी (गोद लिए बच्चे भी सामिल है ) से इस धारा के अंतर्गत गुजारा भत्ताले सकती है |
  • कुवारी लड़की अपने माता और पिता से इस एक्ट के तहत मेंटेनेंस ले सकती है |

धारा 12 घरेलू हिंसा के अंतर्गत कौन लोग खर्चा नही ले सकते है :-

धारा 12 घरेलू हिंसा के अंतर्गत ये लोग, जो व्यक्ति के खर्चा देने के समर्थ होने के बावजूद, भी इससे खर्चा नही ले सकते है |

  • अगर पत्नी पति के बराबर कमाती है तो वो मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • हिन्दू पति होने की स्तिथि में, पहली पत्नी के रहते दूसरी पत्नी खर्चा नही ले सकती है |
  • चरित्रहीन पत्नी , जो पराये पुरुष के सम्पर्क में रहती हो मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • अपनी मर्जी से, बिना किसी तर्क संगत कारण के अलग रहने वाली पत्नी अपने पति से गुजारा भत्ता नही ले सकती है |
  • पति के साथ सहमती बनने के बाद, अलग रहने वाली पत्नी अपने पति से मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • खर्चा बधने के बाद, अपने पति को छोड़कर अपनी मर्जी से अगल रहने वाली पत्नी अपने पति से मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • बालिक विवाहित बेटी अपने माता पिता से मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • समर्थ माँ अपने बेटे या बहु से मेंटेनेंस नही ले सकती है |

हिन्दू मैरिज एक्ट में मेंटेनेंस कैसे ले :-

इस एक्ट की धारा 24 के तहत पत्नी अपने पति से एंट्रिम तोर पर अपने व अपने आश्रित बच्चे के लिए मेंटेनेंस ले सकती है तथा इस एक्ट में जजमेंट आने पर वो धारा 25 हिन्दू मैरिज एक्ट के अंतर्गत पर्मनंट मेंटेनेंस ले सकती है |

हिन्दू मैरिज एक्ट में मेंटेनेंस कैसे लेना नही बनता है :-

  • अगर पत्नी पति के बराबर कमाती है तो वो मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • हिन्दू पति होने की स्तिथि में, पहली पत्नी के रहते दूसरी पत्नी खर्चा नही ले सकती है |
  • चरित्रहीन पत्नी , जो पराये पुरुष के सम्पर्क में रहती हो मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • अपनी मर्जी से, बिना किसी तर्क संगत कारण के अलग रहने वाली पत्नी अपने पति से मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • पति के साथ सहमती बनने के बाद, अलग रहने वाली पत्नी अपने पति से मेंटेनेंस नही ले सकती है |
  • खर्चा बधने के बाद, अपने पति को छोड़कर अपनी मर्जी से अगल रहने वाली पत्नी अपने पति से मेंटेनेंस नही ले सकती है |

सीनियर सिटीजन एक्ट के अंतर्गत मेंटेनेंस :-

इस एक्ट में कोई भी माता पिता जो की 60 वर्ष की उम्र पार कर चुका है वो अपने बेटे या बेटी (गोद लिए भी इसमें शामिल है ) से मेंटेनेंस ले सकते है | अगर उनकी आय अपने बच्चो की आय से ज्यादा है तो नही ले सकते है |

कोर्ट कितना खर्चा तक बांध सकती है :-

वैसे तो कोर्ट किसी भी व्यक्ति की इनकम का 1/3 ही सामने वाली पार्टी को देने के आदेश देती है | अगर उस व्यक्ति के और भी खर्चे है जैसे की लोन या अपने किसी और परिवार के सदस्य की जिम्मेदारी तो वो मेंटेनेंस और भी कम हो सकता है | वैसे मेंटेनेंस का आधार विरोधी पार्टी की इनकम और उसका स्टेटस होता है | तथा सेम ही स्टेट्स शिकायतकर्ता को दिया जाना होता है |

पुलिस का रोल :-

मेंटेनेंस के केस में पुलिस का रोल सिर्फ दोषी व्यक्ति को समन पहुचाने का व सजा होने जेल ले जाने का होता है |

जमानत :-

इन केस में जमानत की जरूरत नही होती है

अगर कोई शिकायतकर्ता कमाता है तो मेंटेनेंस ले सकता है या नही ? :-

अगर शिकायतकर्ता कमाता है तो भी वो मेंटेनेंस ले सकता है लेकिन सिर्फ उस शर्त पर की उसकी इनकम विरोधी पार्टी से कम है | उसे भी सामने वाले के बराबर स्टेटस रखने का क़ानूनी हक़ है तो उसकी इनकम भी विरोधी पार्टी जितनी होनी चाहिए ताकि दोनों एक जैसा जीवन जी सके |

खर्चा बढवाने के सम्बन्ध में याचिका :-

शिकायतकर्ता को कुछ समय बाद अगर लगता है की उसका खर्चा ज्यादा हो गया है या फिर शिकायतकर्ता की इनकम और भी ज्यादा हो गई है तो वो अपना मेंटेनेंस बद्वाने के लिए कोर्ट में आवेदन कर सकता है |

क्या लिव इन रिलेसनशिप में रहते हुए भी कोई महिला खर्चा ले सकती है :-

जी हा, धारा 125 सी.आर.पी.सी. के अंतर्गत महिला ऐसा कर सकती है | बशर्ते की वो व्यक्ति शादी शुदा नही हो | अगर वह व्यक्ति शादी शुदा है तो वो औरत खर्चा नही ले सकती है | ये खर्चा सिर्फ उस व्यक्ति के साथ एक ही छत के निचे रहते हुए ही लिया जा सकता है उसके लिए सुप्रीम कोर्ट की एक जजमेंट है “ चनमुनुजा वरसीसम वीरेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा जे.टी. 2010 (11) sc 132 (sc)”.

क्या तलाक के बाद भी पत्नी खर्चा ले सकती है :-

जी हां तलाक के बाद भी पत्नी धारा 125 सी.आर.पी.सी. के तहत अपने पति से खर्चा ले सकती है तलाक होने का ये मतलब नही है की पति उस महिला से अपनी जिम्मेदारियों से मुह मोड़ लेगा | कोर्ट पत्नी को को तब भी अपने तलाक सुधा पति से खर्चा लेने का अधिकार देती है | हां ये हो सकता है की वो खर्चा उसके परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए कम हो सकता है |

नोट :- किसी भी केस को जितने के लिए केस में सामने वाली पार्टी का सही तरीके से क्रॉस करना बहुत जरूरी है इसलिए आप अगर अच्छा क्रॉस कर सके तो आप केस को पलट भी सकते है
नोट :- गोद लिया गया बच्चा माता व पिता दोनों पर ही खर्चे का केस कर सकता है क्योकि वो दोनों के द्वारा ही गोद लिया जाता है और ऐसे माता पिता भी इस प्रकार के बच्चे पर केस कर सकते है |

जय हिन्द

BY

ADVOCATE DHEERAJ KUMAR

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Category: क्राइम अगेंस्ट वीमेन

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26 Comments

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