affidavit / शपथपत्र / हलफनामें के प्रकार

affidavit / हलफनामा क्या है और कितने प्रकार का होता है इसे कहा-कहा पर रजिस्टर्ड करवा सकते है व झूटे affidavit देने पर क्या होता है |

किसी व्यक्ति द्वारा स्वय या उसके उपर निर्भर व्यक्ति के लिए लिखित रूप में स्वेछापूर्वक की गयी किसी तथ्यात्मक घोषणा को शपथपत्र (affidavit / हलफनामा) कहते हैं। यह घोषणा या शपथ किसी ऐसे व्यक्ति के सम्मुख/अटेस्ट की जाती है जो विधि द्वारा अधिकृत हो (जैसे नोटरी या शपथ/ oath कमिशनर आदि) |

आमतौर पर लोगों को किसी न किसी कारण ऐफिडेविट यानी हलफनामा बनवाना पड़ता है। इसके लिए नोटरी पब्लिक या फिर ओथ कमिश्नर आदि के सामने शपथ ली जाती है और बयान दिया जाता है। उस बयान को अधिकारी अटेस्टेड करता है। इसके बाद ऐफिडेविट का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यह जानना जरूरी है कि ऐफिडेविट के जरिये दिए बयान का कितना महत्व है और उसमें दी गई जानकारियों में कोई गलती नहीं होनी चाहिए।

affidavit कितने प्रकार के होते है:-

ऐफिडेविट तीन प्रकार के होते है जो की निम्नलिखित है |

affidavit

affidavit

  1. पहला affidavit वो है जो की जो की की हम किसी सरकारी कार्यालय या गैर सरकारी कर्यालय में शपथ के रूप में देते है सरकारी कार्यालय या गैर सरकारी कर्यालय में देने वाले  affidavit शादी, उम्र, जन्म, राशन कार्ड, व अन्य से सम्बन्धित होते है |
  2. दूसरा affidavit वो है जो हम कोर्ट में देते है ये affidavit भी दो प्रकार का होता है इसमें कोर्ट के आदेश के अनुसार व्यक्ति को अपनी बोलने वाली बात को लिख कर देनी होती है पहला  affidavit जो  कोर्ट में evidence यानि गवाही के रूप में दिया जाता है ये ज्यादातर चेक बौंसिंग के केस या सिविल केस में दिया जाता है ये साधारण affidavit जैसा ही होता है पर उपर कोर्ट का नाम होता है तथा इसे नये केस या application के साथ कोर्ट में दिया जाता है | दूसरा affidavit वो है जो कोर्ट में गवाही के लिए दिया जाता है इस affidavit में व्यक्ति अपनी कोर्ट की गवाही की बाते लिखता है तथा इसके उपर सिर्फ affidavit की जगह “evidence be the way of affidavit” लिखा जाता है | ये सभी कोर्ट में चलता है |
  3. तीसरा affidavit वो है जो की हलफनामे के नाम से सिर्फ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दिया जाता है इसमे व्यक्ति अपनी कहने वाली बात को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लिख कर देता है |

Affidavit का उदेश्य :-

ऐफिडेविट का उदेश्य अपनी किसी बात को शब्दों में लिख कर किसी सरकारी या गैर सरकारी अधिकारी या कोर्ट के समक्ष लिखित में ये कहने से है की वह व्यक्ति अपने या किसी दुसरे या किसी के बिहाफ पर जो कह रहा है वह पूर्ण सत्य है तथा उसे सच मान कर उसके लिए कार्यवाही की जाये | और इस ओथ एक्ट 1969 के तहत यह तय है कि जो भी बयान ऐफिडेविट में दिया गया है, वह सच है। ऐफिडेविट का इस्तेमाल कोर्ट में भी हो सकता है और अर्द्धन्यायिक संस्था (कमीशन आदि) या किसी दूसरी अथॉरिटी (एमसीडी, डीडीए आदि) के सामने भी हो सकता है।

किस भाषा में होना चाहिए :-

आप ऐफिडेविट को हिंदी , English, या अपने राज्य की भाषा में बनवा सकते है पर हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में ये इंग्लिश में ही दिया जाता है या फिर आप कोर्ट की आज्ञा से अपने राज्य की भाषा में दे सकते है |

साधारण affidavit कैसे लिखे व बनाये  :-

इन affidavit को बनाने के 6 चरण है

  1. affidavit में सबसे पहले उसकी हेडिंग लिखे जैसे जन्म प्रमाण पत्र के लिए affidavit for birth certificate या सिर्फ affidavit  भी लिख सकते है |
  2. इसके बाद affidavit में अपना नाम, उम्र, व पता लिखे
  3. इसके बाद अगर affidavit किसी के बिहाफ पर है तो उसका विवरण दे जैसे अगर आपके बच्चे के लिए है तो आपने बच्चे के नाम, लिंग, उम्र, व उससे अपने सम्बन्ध का विवरण दे |
  4. इसके बाद मूल बात लिखे की आप ये affidavit क्यों बनवाना चाहते है जैसे की affidavit आपके बच्चे की उम्र व जन्म तिथि से सम्बन्धित है तो अपने बच्चे की जो उम्र या जन्म तिथि आप चाहते है उसका विवरण दे और बताये की सही उम्र या जन्म तिथि क्या होनी चाहिए |अगर इसमें कोई और बात भी लिखने की है तो वो भी लिखे की में अभी तक जन्म प्रमाण पत्र क्यों नही बन सका |
  5. इसके बाद शपथ आती है इसमे आप लिखते है की उपर दी गई सारी बाते सत्य है सत्य के अलावा कुछ नही है | इसके बाद आप अपने दस्तखत करते है
  6. अंत में कार्य उस affidavit को रजिस्टर्ड करवाने का होता है जो आप ओथ कमिश्नर या नोटरी पब्लिक अटेस्टेड करवाते है।

एक इनकम affidavit का रूप यहा पर इंग्लिश में दिया गया है

AFFIDAVIT FOR INCOME

I (यहा अपना नाम लिखे) AGE (यहा अपनी उम्र)S/O SH.  (अपने पिता का नाम लिखे) R/O (यहा अपना पूरा पता) , do hereby solemnly affirm and declared as under:

  1. I am citizen of India.
  2. That my family’s income from all source is Rs. 7500/- Per Month i.e. Rs. 90,000/- per year from my Pvt Job./Labour /Business/ Self Employee/ Pension/ Driving / Shop keeper/ Farming Job.
  3. That this affidavit/ Income certificate is required submission to School / College Institute for Scholarship/ fees concession stationery EWS Category or any other facilities. Which is given by Government/ School?
  4. That if any information in this affidavit is found to be false or be incomplete at any stage now or later I am liable to be prosecuted under relevant law.

Deponent

Verification:

Verified at New Delhi on this  (उस दिन की तारीख अंको में ) that the contents of the above affidavit are true and correct to the best of my knowledge and belief.

Deponent

कोर्ट के affidavit कैसे बनाये या लिखे :-

ये affidavit भी  साधारण affidavit जैसा ही होता है सिर्फ इसमे सबसे पहले उस कोर्ट का नाम लिखा होता है जिसमे उसे देना होता है | इस affidavit के अंदर आप सिर्फ अपनी कोर्ट में बोलनी वाली बाते ही लिखते है जो गवाही या किसी विषय जैसे फैमिली कोर्ट में इनकम से सम्बन्धित इत्यादी |

कहा पर अटेस्ट करवाए :-

आप की जानकारी के लिए बता दू की ऐफिडेविट दो प्रकार से अटेस्ट होते है पहले oath commissioner से दूसरा notary से |

  1. जो ऐफिडेविट सिर्फ कोर्ट में ही दिए जाते है सिर्फ oath commissioner से ही अटेस्ट होते है
  2. जो ऐफिडेविट किसी सरकारी या गैर सरकारी कार्यालय में दिए जाते है वे सिर्फ notary से ही अटेस्ट होते है |

स्टाम्प पेपर/ फीस :-

कोर्ट में दिए जाने वाले सभी affidavit पर किसी भी प्रकार की कोई भी फीस या स्टेम्प ड्यूटी नही देनी होती है सिर्फ oath commissioner को ही अटेस्ट के पैसे देने होते है | लेकिन इसके अलावा जितने भी affidavit नोटरी से अटेस्ट होते है उनमे स्टाम्प पेपर लेना होता है वैसे दिल्ली में 10 रुपये के स्टम्प पेपर पर ही affidavit बनते है वैसे शायद बाकी राज्यों में भी ये फीस समान ही है वैसे आप लोगो को बता दू की हर राज्य का अपना stamp duty act है तो राज्य के हिसाब से फीस अलग भी हो सकती है |

झूठा affidavit देने पर सजा

1.अगर कोई शख्स झूठा शपथ पत्र /affidavit अदालती कार्रवाई के दौरान पेश करता है तो अदालत ऐसे शख्स के खिलाफ अदालत में झूठा सबूत पेश करने के मामले में मुकदमा चलाने का आदेश दे सकती है। ऐसे उस व्यक्ति पर सीआरपीसी की धारा-340 के तहत मुकदमा चलता है। अदालत के सामने झूठा सबूत पेश करने के मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 7 साल की कैद का प्रावधान है,

  1. वहीं किसी दूसरी सरकारी या गैर सरकारी कार्यालय के सामने झूठा सबूत पेश करने के मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल कैद की सजा का प्रावधान है।
  2. अगर कोई शख्स किसी और के बदले एफिडेविट पर दस्तखत करता है और उसका गलत इस्तेमाल किया जाता है तो ऐसा करने वाले शख्स के खिलाफ आईपीसी की धारा-419 (पहचान बदलकर धोखा देना) का भी मुकदमा बनता है। जिसमे 3 साल तक की सजा है
  3. अगर ऐसे affidavit का इस्तेमाल किसी को धोखा देने के लिए किया जाए तो जालसाजी का भी केस बन सकता है।

जय हिन्द

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Dheeraj Kumar Advocate

ज्यादा अच्छी जानकारी के लिए इस नंबर 9278134222 पर कॉल करके  online advice ले advice fees  will be applicable.

 

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