जानिए अग्रिम जमानत Anticipatory bail क्या होती है ?

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प्रशन : वकील साहब अग्रिम जमानत Anticipatory bail क्या होती है ? कितने प्रकार की होती है ? तथा अरेस्ट होने से पहले कोर्ट से अग्रिम जमानत  कैसे ले ? तथा कैसे इस बैल का विरोध करे ?

 अग्रिम जमानत  Anticipatory bail क्या है :-

अग्रिम जमानत Anticipatory bail Agrim Jamanat kya hoti

अग्रिम जमानत

जब कोई व्यक्ति गिरफ्तार होने वाला हो, या, उसे ऐसी आशंका हो, की, उसे किसी झूटे केस में फसा कर गिरफ्तार करवाया जा सकता है तो ऐसे में जेल जाने से बचने के लिए वह कोर्ट से पहले ही जमानत लेता है | कोर्ट, पुलिस को आदेश देती है की, इस व्यक्ति को गिरफ्तार नही किया जाये, कोर्ट द्वारा जमानत का ये आदेश अग्रिम जमानत  Anticipatory bail कहलाता है,  ये अग्रिम जमानत 2 प्रकार की होती है :- (1) FIR होने से पहले (2) FIR होने के बाद |

1. FIR होने से पहले :-

अगर किसी व्यक्ति, को ये लगे की उस पर कोई झुटा केस बनवा सकता है या फिर कोई ऐसा करने का प्लान बना रहा है, या फिर, ऐसे हालत हो गए है की उस के खिलाफ कभी भी FIR हो सकती हो, वो व्यक्ति कोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत  Anticipatory bail के लिए आवेदन कर सकता है | इसमें कोर्ट पुलिस को ये आदेश देती है की, अगर कोई FIR उस व्यक्ति / आवेदन कर्ता के खिलाफ करती है तो FIR करने के बाद, पुलिस उसको 7 दिन (या जितने दिन कोर्ट चाहे)  पहले सूचित करेगी और FIR की कॉपी देगी ताकि वह व्यक्ति अपनी बैल/जमानत का इंतजाम कर ले |

2. FIR होने के बाद :-

अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR हो गई है या फिर पुलिस की जाँच में उसका नाम भी आरोपियों की लिस्ट में आ रहा है | तो, वो व्यक्ति भी, इस धारा 438 के अंतर्गत अग्रिम जमानत Anticipatory bail का आवेदन कर सकता है

अग्रिम जमानत का उदेश्य :-

अग्रिम जमानत का उदेश्य, सिर्फ किसी निर्दोष व्यक्ति को, किसी झूटे केस, आर्थिक हानी और बदनामी से बचाने के लिए है | लेकिन ये भी, सिर्फ इस शर्त पर की अगर कोर्ट को ये लगे की वो व्यक्ति निर्दोष है या फिर पुलिस जाँच सही तरीके से नही हो रही है | तो कोर्ट, उसको अग्रिम जमानत देगा |

अग्रिम जमानत सिर्फ सेशन कोर्ट से ही मिलती है या फिर विशेष परिस्तिथियों में अनुच्छेद 226 में हाई कोर्ट से रीट द्वारा ली जा सकती है |

अग्रिम जमानत के मिलने के बाद व्यक्ति को गिरफ्तार नही किया जाता है तथा उसे बिना गिरफ्तार किये ही चार्ज शीट फ़ाइल् की जाती है | भारत के कानून  के अन्तर्गत, गैर जमानती अपराध के आरोप में गिरफ्तार होने की आशंका में कोई भी व्यक्ति अग्रिम जमानत का आवेदन कर सकता है। तथा कोर्ट सुनवाई के बाद सशर्त अग्रिम जमानत दे सकता है। यह जमानत पुलिस की जांच होने तक जारी रहती है।  अग्रिम जमानत का यह प्रावधान भारतीय दंड सहिता  की धारा 438 में दिया गया है। अग्रिम जमानत का आवेदन करने पर शिकायतकर्ता को भी कोर्ट, इस प्रकार की जमानत की अर्जी के बारे में सूचना देती है ताकि वह चाहे तो न्यायालय में इस अग्रिम जमानत का विरोध कर सके ।

उत्तर प्रदेश राज्य में अग्रिम जमानत कैसे ले :-

आपको ये जाकर आश्चर्य होगा की, सारे भारत में एक कानून होने बाद भी उत्तर प्रदेश की हाई कोर्ट ने अपने एक आदेश के अनुसार अपने राज्य में अग्रिम जमानत को ख़तम किया हुआ है | ऐसा वहा पर कानून का ज्यादा दुरूपयोग होने के कारण किया गया है लेकिन वहा पर अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी से बचाना है तो वो सीधे हाई कोर्ट में रिट, अनुच्छेद 226 में फाइल करके अग्रिम जमानत ले सकता है रिट के अंदर हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत लेने की प्रकिर्या है

इंटरिम बैल आदेश क्या है :-

जब आवेदनकर्ता, कोर्ट के सामने अग्रिम जमानत  का आवेदन करता है तो वो जरूरी नही की कोर्ट उसको पहली तारीख पर ही बैल दे कर केस को खत्म कर दे | ये भी हो सकता है की, बैल के आवेदन पर बहस किसी मुद्दे को लेकर लम्बी भी हो सकती है | जिसमे की कई तारीखे भी लग सकती है | ऐसे में आवेदनकर्ता की तरफ से ये आवेदन किया जाता है की उसे इन तारीखों के बिच में पड़ने वाले समय में, फाइनल आर्डर से पहले टम्प्रेअरी तौर पर बैल दे | क्योकि, इस बिच, अगर आवेदनकर्ता गिरफ्तार हो गया, तो इस अग्रिम जमानत अप्लिकेशन और बहस का कोई मतलब नही रहेगा तो ऐसे में कोर्ट आवेदनकर्ता को अगली तारीख तक की सुनवाई तक इंटरिम बैल दे देती है |

बेल का आवेदन किस जगह पर करना चाहिए :-

अग्रिम जमानत  का आवेदन तीन जगह पर किया जा सकता है (1) पहली जगह वो जहा पर वो अपराध हुआ हो तथा (2) दूसरी जगह वो जहा पर शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत दी हो और FIR हुई हो (3) तीसरी जगह वो जहा पर आवेदनकर्ता को अंदेशा हो की, उस के खिलाफ इस जगह पर अफ. आई. आर. हो सकती है

कोर्ट से बैल या जमानत कैसे ले :-

  1. अगर, आपके खिलाफ अभी तक, कोई झूठी अफ. आई. आर. नही हुई है और होने की आशंका है तो इस बात का वर्णन अपनी अप्लिकेशन में करे की शिकायतकर्ता आपको क्यों झूठे केस में फसाना चाह रहा है | इसमें उसको क्या फायदा है या फिर वो ऐसा किस मकसद से कर रहा है
  2. कोर्ट को ये भी बताये की आगर आप गिफ्तार हो गए तो आपको क्या व किस पारकर का नुकशान होगा जैसे की आर्थिक हानि, शारीरिक हानि, मानसिक हानि, और समाजिक हानि इस्यादी व शिकायतकर्ता को इससे क्या फायदा होगा |
  3. अगर, कोई झूठी अफ. आई. आर. आपके खिलाफ हो गई है और आपको इसका पता चल गया है तो उस अफ. आई. आर. की बातो का वर्णन अपनी अप्लिकेशन में करे |की, कैसे वो झूठी है तथा कोई सबूत आपके पास हो तो उसको कोर्ट में पेश करे  | शिकायतकर्ता ने आपके खिलाफ ये झूठी अफ. आई. आर. क्यों करवाई ? इसका कारण जरुर बताये | क्योकी कोर्ट आपको दोषी समझती है कोर्ट को ये बताना बहुत ही जरूरी होता है की, ये आप के खिलाफ क्यों किया गया | ताकि कोर्ट का सबसे पहले ये विचार सही हो सके की, अफ. आई. आर. पूरी तरह से सच्ची नही है |
  4. इस प्रकार की बेल में सबसे ज्यादा बड़ा मुद्दा ये होता है की, आरोपी से रिकवरी होनी बाकी है तथा आरोपी किस गवाह या शिकायतकर्ता को परेशान कर सकता है तो अगर किसी भी प्रकार की रिकवरी का मुद्दा अगर केस में नही है तो इस बात पर कोर्ट में जोर दे कर कहे तथा आप किसी भी गवाह या शिकायतकर्ता को परेशान नही करेंगे इसका विश्वास भी कोर्ट को दिलाये |
  5. कोर्ट को ये समझाने की कोशिश करे की इस अफ. आई. आर. में अब किसी भी प्रकार की इन्क्वारी की जरूरत नही है तथा न ही कोई नया मोड़ आया है तो मुझे अग्रिम जमानत दी जाये
  6. अगर आप पर पहले कोई अपराधिक रिकोर्ड नही है तो वो भी बेल लेने का कारण हो सकता है आप बैल के लिए अपनी टैक्स रिटन या अपने पर आश्रित परिवार के लोगो जैसे बुजुर्ग माता पिता, बच्चे या अपनी कम या ज्यादा उम्र का सहारा ले कर भी बेल ले सकते है
  7. बैल या जमानत लेने में सबसे बड़ी बाधा पुलिस यानि (आई. ओ.) व सरकारी वकील होते है अगर वे आपकी बैल का ज्यादा विरोध नही करे तो भी कोर्ट का मन आपको बैल देने का मन बन सकता है अब इन लोगो को विरोध करने से कैसे रोके ये मुझे आप लोगो को समझाने की जरूरत नही है आपके वकील साहब उन तरीको को अच्छे से जानते है |

अग्रिम जमानत का विरोध कैसे करे :-

अग्रिम जमानत Anticipatory bail  के केस में ज्यादातर शिकायतकर्ता को नोटिस देकर कोर्ट में बुलाया ही जाता है ताकि कोर्ट को केस की स्तिथि और सच का पता चल सके लेकिन अगर आप चाहे तो तो कोर्ट में एक कैविट की एप्लीकेशन लगा कर, जब भी आरोपी की अग्रिम जमानत Anticipatory bail  लगे, आप को विरोध के लिए नोटिस मिले, ऐसी व्यवस्था कर सकते है

  1. हमेशा कोर्ट में अपराधी के बैल मिलने पर स्वय शिकायतकर्ता, गवाहों व सबूतों को प्रभावित होने का आरोप लगाये की बैल  आवेदनकर्ता, जमानत ले कर उसका दुरूपयोग कर सकता है
  2. अगर किसी चीज या समान का केस में मिलना जरूरी या वो गुम है तो, पुलिस के द्वारा आवेदनकर्ता की कस्टडी यानि गिरफ्तारी की मांग करे
  3. अगर आप के पास कोई केस से सम्बन्धित पेपर जैसे की आपका मेडिकल या कोई और सबूत तो | उस सबूत को आप कोर्ट में अपने साथ ले कर जाये व दिखा कर बैल या जमानत का विरोध करे
  4. कोर्ट में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब बहुत ही शालीनता व समझ से दे | ताकि कोर्ट को ये लगे की आप सही है
  5. अगर कोर्ट अपराधी को बैल दे भी दे तो आप उपर की कोर्ट में उसकी बैल ख़ारिज करवाने की एप्लीकेशन लगा सकते है
  6. सरकारी वकील व पुलिस यानि आई. ओ. पर पूरी नजर रखे अगर वे अपराधी की तरफदारी करे या उसका बैल होने में साथ दे तो आप उनकी शिकायत कर के इन्हें बदलवा भी सकते है | ज्यादा अच्छा हो की आप बैल या जमानत का विरोध करने के लिए अपने खुद के वकील साहब अपोइन्ट कर ले तो ज्यादा अच्छा होगा

अग्रिम जमानत को निरस्त करवाना :-

अगर किसी व्यक्ति को अग्रिम जमानत मिल गई है, तो शिकायतकर्ता, सेशन कोर्ट जिसने ये जमानत दी है या फिर हाई कोर्ट में इसके खिलाफ आवेदन करके इसको निरस्त करवा सकता है | ऐसे में ये डिफेंस लिया जाये की वो व्यक्ति, अपनी जमानत का गलत इस्तेमाल कर रहा है तथा गवाहों व सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी कर रहा है

अग्रिम जमानत के लिए बैल बांड या प्रतिभूति :-

इस केस में जमानत मिलने के बाद पुलिस स्टेशन में जमानत देनी होती है तथा बाद में केस शुरू होने के बाद दुबारा कोर्ट में | आप बैल या जमानत के लिए प्रतिभूति के तौर पर (1) अपनी गाड़ी की आर. सी. (2) रजिस्टर्ड जमीन के पेपर या जमीन की फर्द (3) बैंक की अफ. डी. (4) इंद्रा विकास पत्र (5) सरकारी नोकरी होने पर तीन महीने से कम पुरानी पे स्लिप तथा ऑफिस आई. कार्ड. की कॉपी इत्यादि पर कोर्ट के बताये मूल्य के अनुसार हो तो जमानत की प्रतिभूति के लिए देनी होती है |

अग्रिम जमानत मिलने की शर्ते :-  

ज़मानत पर रिहा होने का मतलब है कि आपकी स्वतंत्रता तो है पर आप पर कई प्रकार की बंदिशे भी कोर्ट द्वारा लगाई जाती है ये बंदिशे बैल बांड से अलग है जैसे की आप रिहा हो कर शिकायतकर्ता को परेशान नही करेंगे, किसी भी गवाह या सबूत को प्रभावित नही करेंगे |

इसके अलावा कोर्ट आप पर विदेश न जाने के लिए भी बंदिश लगा सकती है तथा आप का उसी शहर में रहना या किसी निश्चित एरिया में रहना तय कर सकती है या आप का किसी निश्चित दिन या फिर हर रोज पुलिस स्टेशन में आकर हाजरी लगवाना भी निश्चित कर सकती है

ऐसा न करने करते पाये जाने पर आपकी बैल या जमानत को कोर्ट रद्द कर सकता है ज्यादातर मामलो में पाया जाता है की शिकायत कर्ता कोर्ट में झूठी शिकायत दे देते है की, आरोपी बैल या जमानत लेकर उसका दुरूपयोग कर रहा है तथा गवाहों को व उसे धमका रहा है, जिससे की आरोपी की जमानत रद्द हो जाये | ऐसे में आप इन चीजो से बचे व सावधान रहे |

अग्रिम जमानत  Anticipatory bail धारा 438 का हिंदी रूपांतरण क्या है :-

धारा 438 का पूरा हिंदी रुपंतार्ण निचे उसके सपष्टीकरण के साथ दिया है :-

धारा 438

  1. गिरफ्तारी की आशंका करने वाले व्यक्ति की जमानत मंजूर करने के लिए निदेश –

(1) जब किसी व्यक्ति को, यह विश्वास है की उसे, अजमानतीय अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है, तो वह इस धारा के अधीन उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय को आवेदन कर सकता है, कि, ऐसी गिरफ्तारी की स्थिति में उसे जमानत पर छोड़ दिया जाए और न्यायालय अन्य सभी बातों के विचारों के साथ-साथ निम्न बातों को ध्यान में रखकर, –

स्पस्टीकरण :- अगर, किसी व्यक्ति को ये विश्वास हो जाये की, उसे किसी नॉन बेलेबल ओफ्फेंस में गिरफ्तार किया जा सकता है है तो, गिरफ्तारी से बचने के लिए, वह  व्यक्ति हाई कोर्ट या सेशन कोर्ट में  अग्रिम जमानत  Anticipatory bail के लिए आवेदन कर सकता है और, न्यायालय उसके आवेदन पर विचार कर के उसको बैल दे सकते है |

(i) आरोप की प्रकृति एवं गंभीरता,

स्पस्टीकरण :- कोर्ट बेल देने से पहले ये देखेगा, की, आवेदनकर्ता  पर आरोप किस प्रकार का है तथा, उस अपराध की गम्भीरता क्या है ? तब वह बेल देगा |

(ii) आवेदक का पूर्ववत जिसमें यह तथ्य भी सम्मिलित है कभी पूर्व में किसी संज्ञेय अपराध के बाबत में न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध होने पर कारावास का दण्ड भोगा है या नहीं,

स्पस्टीकरण :- कोर्ट बेल देने से पहले ये देखेगा, की, आवेदनकर्ता  पर,  पहले किसी भी प्रकार का कोई आरोप सिद्ध तो नही हुआ है तथा उसके लिए उसने कोई दण्ड तो नही भोगा है |  ये देखकर कोर्ट बेल देगी |

(iii) आवेदक के न्याय से भागने की संभावना, और

स्पस्टीकरण :- कोर्ट ये भी देखेगा की कहि, ऐसा तो नही की आवेदनकर्ता अग्रिम जमानत लेकर फरार न हो जाये,

(iv) आवेदक को गिरफ्तार करके उसे चोट पहुंचाने या अपमानित करने के उददेश्य से आरोप लगाया गया है,

या, तो आवेदन को तत्काल अस्वीकार किया जावेगा या अग्रिम जमानत प्रदान करने का अंतरिम आदेश दिया जाएगा:

स्पस्टीकरण :- कोर्ट बेल देने से पहले ये देखेगा, की, आवेदनकर्ता पर केस उसको गिरफ्तार करके, सिर्फ चोट पहुचने या अपमानित करने के उदेश्य से ही केस लगाया गया है |

या इस धारा के अंतर्गत कोर्ट बिना समय गवाये या तो आवेदनकर्ता की अग्रिम जमानत  Anticipatory bail को स्वीकार करेगी या अस्वीकार

परन्तु यह कि जहाँ जैसी स्थिति हो उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय ने इस उपधारा के अधीन कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है या अग्रिम जमानत प्रदान करने के आवेदन को अस्वीकार कर दिया है, तो पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी का यह विकल्प खुला रहैगा कि ऐसे आवेदन के आशंकित आरोप के आधार पर आवेदक को बिना वारंट गिरफ्तार कर ले ।

स्पस्टीकरण :- अगर, इस धारा 438 में, आवेदनकर्ता का आवेदन हाई कोर्ट या सेशन कोर्ट में लंबित हो या नही हो दोनों ही स्तिथि में अगर कोर्ट ने अग्रिम जमानत नही दी है तो पुलिस आवेदनकर्ता को अरेस्ट कर सकती है और अगर आवेदनकर्ता का केस कोर्ट कैंसिल कर देती है तो भी पुलिस आवेदनकर्ता को अरेस्ट कर सकती है और इसमें अरेस्ट करने के लिए पुलिस को अरेस्ट वारंट की भी जरूरत नही है पुलिस सिर्फ संशय के आधार पर भी आवेदनकर्ता को अरेस्ट कर सकती है

(1क) जहाँ न्यायालय उपधारा (1) के अधीन अंतरिम आदेश देता है तो वह तत्काल सूचना कार्यान्वित करेगा, जो सात दिनों से कम की सूचना की नहीं होगी जो ऐसे आदेश की एक प्रति के साथ जो लोक अभियोजन और पुलिस अधीक्षक को भी देय होगी जो न्यायालय द्वारा आवेदन की अंतिम सुनवाई में लोक अभियोजक को सुनने का युक्तियुक्त अवसर दिए जाने की दृष्टि की होगी।

स्पस्टीकरण :- इसमें कोर्ट अगर, आवेदनकर्ता को अंतरिम आदेश मतलब इंटरिम आर्डर देता है की अगली सुनवाई से पहले आवेदनकर्ता को अरेस्ट नही किया जाये तो कोर्ट ऐसा आर्डर देने के बाद अगली सुनवाई से पहले | इसकी सुचना सरकारी वकील और इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर यानि की आई. ओ. को 7 दिनों के अंदर दी जाएगी  | ताकि,  पुलिस और सरकारी वकील को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाये |

(1ख) न्यायालय द्वारा अग्रिम द्वारा जमानत चाहने वाले आवेदन की अंतिम सुनवाई और अंतिम आदेश देने के समय आवेदक की उपस्थिति, यदि लोक अभियोजक द्वारा आवेदन करने पर, न्यायालय, न्याय हित में विचार करें कि ऐसी उपस्थिति आवश्यक है तो बाध्य कर होगी।

स्पस्टीकरण :- अगर, सरकारी वकील के आवेदन करने पर या फिर कोर्ट को अगर, स्वय उचित लगे तो आवेदनकर्ता को फाइनल आर्डर के समय, या इससे पहले, कोई इंटरिम आर्डर पास करते समय, वो आवेदनकर्ता को कोर्ट में बुलाने का आदेश दे सकता है |

(2) जब न्यायालय या सेशन न्यायालय उपधारा (1) के अधीन निदेश देता है तब वह उस विशिष्ट मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उन निदेशों में ऐसी शर्तें, जो वह ठीक समझे, सम्मिलित कर सकता है जिनके अंतर्गत निम्नलिखित भी है –

स्पस्टीकरण :- अगर हाई कोर्ट या सेशन कोर्ट उपधारा (1) के निर्देशों के अधीन होकर,  कोई इंटरिम या फाइनल आर्डर देता है| तो वो, कोई भी कंडीशन या रुल अपने आदेश में सम्मिलित कर सकता है कुछ शर्ते या नियम निम्नलिखित भी हो सकती है

  • यह शर्त कि, वह व्यक्ति, पुलिस अधिकारी द्वारा पूछे जाने वाले परिप्रश्नों का उत्तर देने के लिए जैसे और अपेक्षित हो, उपलब्ध होगा,

स्पस्टीकरण :- कोर्ट ये शर्त रख सकता है की, जब भी पुलिस, आवेदनकर्ता को बुलाएगी वो पुलिस स्टेशन में उसके सवालों के जवाब देने के लिए उपस्तिथ होगा

  • यह शर्त कि, वह व्यक्ति उस मामले के तथ्यों से अवगत किसी व्यक्ति को न्यायालय या किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष ऐसे तथ्यों को प्रकट न करने के लिए मनाने के वास्ते प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः उसे कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन नहीं देगा,

स्पस्टीकरण :-  ये शर्त की, आवेदनकर्ता किसी भी व्यक्ति, पुलिस ऑफिसर,  को कोर्ट के लिए या फिर किसी और बात के लिए, मनाने , बहलाने, धमकी देने या किसी कार्य के लिए वचन देने का कार्य स्वय या किसी के द्वारा नही करवाएगा

  • यह शर्त कि, वह व्यक्ति न्यायालय की पूर्व अनुज्ञा के बिना भारत नहीं छोड़ेगा,

स्पस्टीकरण :-  आवेदनकर्ता,  बिना कोर्ट के आदेश के भारत नही छोड़ेगा

  • ऐसी अन्य शर्ते, जो धारा 437 की उपधारा (3) के अधीन ऐसे अधिरोपित की जा सकती है मानो उस धारा के अधीन जमानत मंजूर की गई है।

स्पस्टीकरण :- अगर, किसी और आरोपी को, धारा 437 (3) के अंतर्गत इसी केस में, बेल मिली है और कोई शर्त उस आरोपी के साथ जोड़ी गई है तो वो शर्त इस आवेदनकर्ता के साथ भी जोड़ी जाएगी |

(4) तत्पश्चात ऐसे व्यक्ति को ऐसे अभियोग पर पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा वारंट के बिना गिरफ्तार किया जाता है और वह या तो गिरफ्तारी के समय या जब वह ऐसे अधिकारी की अभिरक्षा में है तब किसी समय जमानत देने के लिए तैयार है, तो उसे जमानत पर छोड़ दिया जाएगा, तथा यदि ऐसे अपराध का संज्ञान करने वाला मजिस्ट्रेट यह विनिश्चय कराता है कि उस व्यक्ति के विरूद्ध प्रथम बार ही वारंट जारी किया जाना चाहिए, तो वह उपधारा (1) के अधीन न्यायालय के निदेश के अनुरूप जमानतीय वारण्ट जारी करेगा।

स्पस्टीकरण :- अगर, अग्रिम जमानत  लेने के बाद आवेदनकर्ता किसी भी स्थान पर, बेल के केस से सम्बन्धित मामले में ही,  पुलिस द्वारा बिना वारंट के गिरफतार होता है तो पुलिस उसको उसी वक्त पर्सनल बेल पर छोड़ेगी, तथा बेल के केस  में मजिस्ट्रेट, अगर चाहे तो,  पहली बार में ही बेलेबल/जमानतीय  वारंट इशू करके इस उपधारा (1) के अंतर्गत, आवेदनकर्ता को कोर्ट में बुलवा सकता है |

If, you want legal advice through mobile, please make a call on 9278134222. Advice fees will be charged 500 rupees for 24 hours.

जय हिन्द

द्वारा

अधिवक्ता धीरज कुमार

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