जाने section 138 n.i. act का पूरा क्रिमिनल ट्रायल

Loading...

प्रशन :- वकील साहब section 138 n.i. act केस का पूरा क्रिमिनल ट्रायल का विवरण शिकायत कर्ता और दोषी पक्ष दोनों की तरफ से दे | ये भी बताये की सजा होने पर क्या हो सकता है :-

उतर :- इससे पहले वाले भाग में हम section 138 n.i. act  केस के बनाने, फाइलिंग व अन्य बाते के बारे में जान चुके है | आइये आज इसके क्रिमिनल 138 n.i. act ट्रायल के बारे में जानते है | मैंने इसे 12 भागो में बाटा है |

1. section 138 n.i. act की कंप्लेंट / शिकायत पत्र फाइल करना :-

जैसे की में अपनी पहली पोस्ट section 138 n.i. act के अनुसार हम केस बनाते है और उसे फाईलिंग काउंटर पर फाइल कर देते है जो की अगले दिन आता है उस दिन शिकायतकर्ता अपने वकील साहब के साथ जाता है वहा जज साहब के सामने केस में limitation व अन्य चीजे चेक की जाती है और केस के ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स जो की फाइल में लगे है या उनकी फोटो कॉपी लगी है उनको एक्सिबिट किया जाता है | तथा जिन डाक्यूमेंट्स का कोई ओरिजिनल हमारे पास नही है या फिर नही हो सकता है जैसे की नोटिस रिसीव की इन्टरनेट से ली गई कॉपी इत्यादि वे डाक्यूमेंट्स यहा पर मार्क किये जाते है |

जब डाक्यूमेंट्स को एक्सिबिट किया जाता है तो उनको EXBT. CW1/1 करके लिखा जाता है  अगला डाक्यूमेंट्स EXBT. CW1/2 होता है | यहाँ EXBT. का मतलब exhibited है ये शोर्ट में लिखा जाता है तथा CW 1 का मतलब, ये इस कोर्ट में शिकायत पक्ष की तरफ से पहला गवाह है  और दुसरे  /1 का मतलब होता है की ये exhibited डाक्यूमेंट्स का पहला नंबर है तथा इस प्रकार दुसरे डाक्यूमेंट्स को 2 नंबर दे दिया जाता है

जिन डाक्यूमेंट्स को मार्क करना होता है उनको MARK लिख कर अल्फाबेटिक जैसे A या B नाम दिए जाते है ताकि डाक्यूमेंट्स को पड़ने और दुसरे को समझाने और समझने में आसानी हो |

ट्रायल केस ऑफ़ section 138 n.i. act

इसके अलावा हम section 138 n.i. act केस में evidence by the way of affidavit को EXBT. CW1/A करके एक्सिबिट करते है | ताकि ये बाकी डाक्यूमेंट्स से अलग लगे | इसी में सारे डाक्यूमेंट्स के एक्सिबिट लिखे होते है  |

इसके अलावा हम इसके निचे मजिस्ट्रेट की पोस्ट और कोर्ट का नाम लिखते है इसके निचे तारीख लिखते है जिस पर बाद में मजिस्ट्रेट साहब अपने हस्ताक्षर करते है | सभी राज्यों के अनुसार इसका प्रारूप अलग हो सकता है | लेकिन में अगर दिल्ली की बात करू तो वहा हम इन दोनों को ऐसे लिखेंगे :-

EXBT. CW1/1

M.M.  DWARKA COURT

DATED 01.06.2019

MARK A

M.M. DWARKA COURT

DATED 01.06.2019

नोट :- अगर एक डाक्यूमेंट्स में ज्यादा पेज हो तो वहा  CW1/1 और  MARK A के बाद COLLY कोली  शब्द लिख दिया जाता है | ये शब्द दर्शाता है की इस एक exhibit डाक्यूमेंट्स में एक से ज्यादा पेज है |

 

इसी दिन आरोपी को कोर्ट नोटिस इशू कर देती है जिसके लिए आप को P. F. फाइल करना होता है जो की प्रोसेस सर्वर / स्पीड पोस्ट / R.C. / दस्ती इन रूपों में होता है |

2. P. F. क्या है इसे कैसे फाइल करे :-

P.F. मतलब प्रोसेस फीस फॉर्म होता है इसके द्वारा हम आरोपी को नोटिस भेजते है | दुसरे शब्दों में कहे तो अपने <h2>section 138 n.i. act<h2> के केस की शिकायत पत्र की कॉपी कोर्ट के समन के साथ आरोपियों को भेजते है |

P.F. फॉर्म में हम आरोपियों के नामो की डिटेल उनके एड्रेस के साथ देते है | इसमे कोर्ट फीस भी लगती है जो की आरोपियों की संख्या और आपके राज्य के अनुसार अलग-अलग होती है इसलिए में यहा उसका विवरण नही कर रहा हु |

इसमे आप आरोपियों की संख्या और उनके एड्रेस के अनुसार और नोटिस को भेजने के प्रकार के अनुसार शिकायत पत्र की कॉपीया अहलमद को देते है | स्पीड पोस्ट या R. C. के मामले में हम लिफाफे को नाम पते के साथ भर कर उसे पोस्ट ऑफिस से लिफाफे पर फीस लगवा कर अहलमद को देते है |

section 138 n.i. act के केस में इस प्रोसेस का रूप भी  राज्यों के अनुसार भिन्न हो सकता है

3. आरोपी की कोर्ट में पेशी :-

जब आरोपी को section 138 n.i. act के केस में समन मिलता है तो वो कोर्ट में पेश होता है अगर समन मिलने पर भी कोर्ट में पेश नही होता है तो कोर्ट उसके वारंट इशु कर देती है |

4. section 138 n.i. act के केस में जमानत :-

जब आरोपी कोर्ट में पेश होता है तो सबसे पहले अपनी बैल करवाता है | अगर उसे नोटिस यानि section 138 n.i. act के केस की शिकायत पत्र की कॉपी नही मिली है या जो मिली है वो साफ या पड़ने लायक नही है तो वो कोर्ट से एक साफ नई शिकायत पत्र की कॉपी की मांग करता है और वो उसे फ्री में दिलवाई जाती है  |

section 138 n.i. act केस में जमानत कैसे ले :-

सबसे पहले कोर्ट में जा कर फॉर्म नो. 45 भरे इसमें अपने व जमानती के पेपर लगाये, जमानत की पूरी जानकारी के लिए मेरी पोस्ट बैल या जमानत क्या होती है देखे |

आपके उपर जो केस है वो बैलेबल है उसमे कोर्ट आपको आसानी से जमानत दे देगा | कोई परेशानी नही होगी |

  1. <h3>section 138 n.i. act<h3> केस में जमानत आपको 10,000 या 20,000 या इसके आस पास के अमाउंट पर मिलेगी या फिर चेक अमाउंट के अनुसार मिल जाएगी | अगर पहली तारीख पर आप जमानती नही पेश कर सकते है तो कोई बात नही है आप अगली तारीख पर जमानत ले सकते है |
  2. अगर कोर्ट में आपके खिलाफ जमानती या गैर जमानती वारंट इशू भी है तो भी आप उसको आसानी से कैंसिल करवा कर जमानत ले सकते है |

5. section 138 n.i. act में नोटिस फ्रेम :-

जैसे क्रिमिनल केस में चार्ज लगता है वैसे ही इस केस में नोटिस फ्रेम होता है | इसमें कोर्ट आपको धारा 138 के अंतर्गत आप पर नोटिस फ्रेम कर के केस को कंप्लेंट की गवाही में लगा देती है | ये नोटिस धारा 138 / 142 N. I. act या इस एक्ट की किसी और धारा में केस के अनुसार हो सकता है |

नोटिस फ्रेम पर बहस और आरोपी का बरी होना

क्रिमिनल केस की तरह ही section 138 n.i. act  में नोटिस पर भी बहस होती है की आरोपी के खिलाफ कोई केस नही बनता है या कोर्ट को लगता है की शिकायतकर्ता के केस फाइल करने में कोई कमी है या आरोपी के पास पर्याप्त सबूत है जो एक नजर में ही साबित करते है की आरोपी निर्दोष है | तो कोर्ट इस नोटिस फ्रेम की स्टेज पर भी आरोपी को बरी कर सकती है

6. शिकायतकर्ता द्वारा धारा 143A N. I. ACT के अंतर्गत आवेदन :-

नोटिस फ्रेम होते ही शिकायत कर्ता की तरफ से एक आवेदन धारा 143A N. I. ACT में किया जाता है  जिसमे कोर्ट से पुरे चेक अमाउंट का 20% पैसा आरोपी द्वारा कोर्ट में जमा कराने का आवेदन होता है  | साथ ही ये भी आवेदन होता है की उसे यानी शिकायतकर्ता को क्रॉस करने की परमिशन धारा 145 (2) के अंतर्गत ये पैसा मिलने के बाद ही दे | तब आरोपी को 20 % पैसा जमा करवाने का आदेश दे भी सकती है और नहीं भी | ये उसके विवेक पर निर्भर करता है |

7. section 138 n.i. act में शिकायत पक्ष की गवाही / क्रॉस :-

इसमे पहले आरोपी द्वारा धारा 145(2) of the NI Act के अंतर्गत आवेदन होता है जिसमे शिकायतकर्ता का क्रॉस करने की परमिशन ली जाती है जो की आमतौर पर मिल जाती है | इसके बाद सबूतों के साथ शिकायतकर्ता का क्रॉस होता है exhibit और mark डाक्यूमेंट्स पर सवाल किये जाते है | अगर जरूरत हो तो शिकायतकर्ता की तरफ से और भी गवाही करवाई जा सकती है |

C.E./ शिकायत पक्ष की गवाही के बाद आरोपी का बरी होना

अगर शिकायतकर्ता की गवाही या फिर शिकायतकर्ता के अन्य गवाहों की गवाही के बाद कोर्ट को ये लगता है की शिकायतकर्ता का section 138 n.i. act केस गलत है उसमे कोई दम नही है तो वो आरोपी को इस स्टेज पर भी बरी कर सकती है

8. स्टेटमेंट ऑफ़ accused :-

section 138 n.i. act के केस में शिकायतकर्ता की तरफ से गवाही खत्म होने के बाद स्टेटमेंट ऑफ़ accused होती है | जिसमे कोर्ट आरोपी से केस से सम्बन्धित सवाल करती है | जिसका जवाब ज्यादातर हां या ना में ही होता है | इसमें अगर आरोपी अपनी गलती नही मानता है तो वो अपनी गवाही करवाता है

9. आरोपी पक्ष की गवाही / क्रॉस :-

section 138 n.i. act केस में अगर आरोपी कोई सबूत पेश करना चाहता है या कोई गवाह पेश करना चाहता है या फिर कोई सबूत कोर्ट के सामने मंगवाना चाहता है तो वो अपनी गवाही की बारी में ऐसा कर सकता है | इसके बाद केस बहस में चला जाता है

10. बहस या आर्गुमेंट :-

section 138 n.i. act के केस के इस चरण में दोनों पक्षों के वकील साहब अपनी तरफ से बहस करते है इसे सुनने के बाद कोर्ट अपना जजमेंट सुनाती है

11. section 138 n.i. act केस में आदेश / जजमेंट :-

कोर्ट सारे केस के अनुसार या तो आरोपी को बरी करती है या फिर सजा सुनाती है | अगर कोर्ट आपको बरी करती है तो वो उस के लिए मुआवजा भी दे सकती है | जिसमे उसकी कोर्ट में परेशानी और क़ानूनी खर्चे स्मलित होते है | जो की चेक अमाउंट के अनुसार हजारो से लाखो में  भी हो सकते है  | अगर आरोपी का कोई अमाउंट कोर्ट में जमा है तो वो  उसको वापस मिलता है

जब भी कोर्ट किसी आरोपी को दोषी पाती है तो वो अपनी जजमेंट में ये सजा करने के कारण लिखती है तथा सजा कितनी करनी है ये नही लिखती | इसके लिए वो केस को आर्डर ऑफ़ संटेंस पर लगा देती है |  इस आर्डर में दोषी को कितनी सजा दी गई है ये लिखा होता है | ये आदेश जजमेंट से अलग होता है और उसी तारीख पर नहीं होता है | अगले दिन या फिर अगली तारीख पर होता है

12. सेंटेंस ऑफ़ जजमेंट :-

जैसे की मैंने उपर बताया है की section 138 n.i. act केस में सजा 2 साल से ज्यादा की नही हो सकती है ऐसे में आपको अपील के लिए बैल इसी कोर्ट से मिल जाती है | अगर सजा का परावधान 3 साल से ज्यादा का होता और 3 साल से ज्यादा की सजा मिलती तो आपको जेल में जाना ही पड़ता है और बैल सेशन कोर्ट से होती है |

सजा होने पर बैल और धारा 389 CR.P.C :-

सजा होने पर दोषी पक्ष के वकील साहब सजा सुनाने से पहले कोर्ट में अंतरिम बैल के लिए धारा 389 CR.P.C. के अंतर्गत आवेदन करते है | इसमें ये भी आवेदन होता है की दोषी को कम से कम सजा की जाए तथा उन कारणों का विवरण देते है जिनसे की सजा कम हो सके जैसे की दोषी की कम या ज्यादा उम्र, परिवार की जिम्मेदारी का बोयरा, कोई बीमारी हो उसका जिक्र, या कोई ऐसी जिम्मेदारी जैसे की बच्चो की शादी करनी या माता पिता की कोई बीमार हो  इस प्रकार परेशानियों का जिक्र इस आवेदन में किया जाता है |

इस केस में कोर्ट को 2 साल तक की सजा देने की पॉवर है तथा चेक अमाउंट का डबल तक पैसा लोटने की और फाइन लगाने की भी

section 138 n.i. act केस में आपको बैल अगले 30 दिन के लिए मिलती है इसमें आपको अगले 30 दिनों में सेशन कोर्ट में अपील करके दुबारा बैल लेनी होती है झा आपका केस दुबारा से सुना जाता है |

section 138 n.i. act के की कुछ अन्य बाते :-

आपका section 138 n.i. act केस कोर्ट में स्वय द्वारा समझोता करके या फिर मध्यस्ता केंद्र में भी लग कर समाप्त हो सकता है

केस में जितने के लिए सबसे जरूरी है सामने वाली पार्टी का क्रॉस करना, क्रॉस करने की ये कला हारे हुए केस को भी जीत में बदल सकती है ये ही वकालत की जान है | इस पर फिर किसी और पोस्ट में लिखूंगा तब तक के लिए

जय हिन्द

द्वारा

ADVOCATE DHEERAJ KUMAR

ज्यादा अच्छी जानकारी के लिए इस नंबर 9278134222 पर कॉल करके  online advice ले advice fees  will be applicable.

 

इन्हें भी जाने :-

 

 

 

Loading...
Share on Social Media
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

24 Comments

  1. Munna borado
  2. रिंकू
  3. Daulat Rathore
  4. Param Jeet Singh
  5. Vivek
  6. Amir Mullah
  7. Joginder Singh
  8. Kshemya
  9. Rajesh
  10. Bharati
  11. Adv Manish Kumar Angira

Leave a Reply

Copy Protected by Chetan's WP-Copyprotect.