kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. क्या है

प्रश्न :-वकील साहेब ये kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. क्या होती है इसमें  कार्यवाही क्या होती है? ये केस कितने समय तक चलता है क्या पहली ही तारीख में ये केस खत्म हो सकता है व इसमे कितनी सजा है क्रपया विस्तार से बताने का कृपा करे मेहरवानी होगी ?

उत्तर :- पुलिस का सबसे बड़ा कार्य समाज में शांति बनाये रखना व लागु कानून का पालन करवाना है अगर कोई व्यक्ति समाज की शांति भंग करता है तो पुलिस का ये कर्तव्य है की वो उस व्यक्ति को ऐसा करने से रोके इसको रोकने के लिए जो कानूनी कार्यवाही की जाती है उसे  kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. कहते है|  समाज के नागरिक छोटी बातो के लिए ज्यादी लम्बी कोर्ट की कारवाही में न फसे व ज्यादा सजा से उन्हें बचाने व नागरिको में भाई – चारा बनाये रखने और इस छोटी क़ानूनी कार्यवाही से ही समाज में सुधर हो जाये इसके लिए C.R.PC. में ये provision रखा  गया है| वरना इन धाराओ के अंतर्गत आने वाले अपराधो के लिए I.P.C. में भी सख्त provisions है|  ये कलन्दरा proceeding दो भागो में बटी है|

(1) पहले भाग में धारा 107/150 R.PC. आरोपियों पर लगती है इसमे आरोपि व्यक्तियों को गिरफ्तार नही किया जाता है तथा आरोपी व्यक्तियो को नोटिस देकर कोर्ट में बुलाया जाता है वहा पर उनका केस चलता है |

(2) दुसरे भाग में धारा 107/151 R.PC. लगती है जिसमे आरोपियों को उसी वक्त गिरफ्तार कर लिया जाता है 24 घंटे में उन्हें magistrate के सामने पेश किया जाता है जहा उनकी जमानत होती है तथा उन पर केस चलता है |

इस kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. के  अंतर्गत आने वाली धाराओ का संछेप विवरण का हिंदी रूपांतरण निम्नलिखित है :-

(1) इस धारा के अनुसार के अनुसार एरिया मजिस्ट्रेट या कोई और अधिकारी (special executive magistrate (S.E.M.) जो कि एक पुलिस अफ़सर C.P.होता है) जिसे इस कार्य के लिए नियुक्त किया गया हो किसी भी व्यक्ति के लिए ये आर्डर प्रषित करे और ऐसा अगर प्रशासन को लगता है की अमुख ब्यक्ति से शांति भंग हो सकती है या ऐसे कहे की अशांति फैलाई जा सकती है तो शांति भंग होने के संदेश के आधार पर किसी व्यक्ति को यह नोटिस दे सकता है, कि क्यों न उसके अगले आदेश तक या फिर एक वर्ष के लिए उसे स्वयं की या अन्य लोगोंकी जमानत के साथ उसे यह लिखवा देने को बाध्य किया जाये या उस व्यक्ति को बाउंड किया जाये कि अगले आदेश तक या एक वर्ष तक कोई भी ऐसा काम नहीं करे जिससे शांति भंग होने कि सम्भावना हो |

(2) इसका केस की proceeding उस एरिया मजिस्ट्रेट के पास ही चलेगी जिस के छेत्रधिकार में ये केस हुआ है |

 

kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c.

kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c.

 Section 150 in The Code Of Criminal Procedure, 1973

अगर कोई पुलिस ऑफिसर कोई भी ऐसी इनफार्मेशन received करता है (समाज में शांति भंग होने की) तो वह अपने अधिन्यस्त ऑफिसर या किसी भी ऐसे पुलिस ऑफिसर को ये जानकारी देगा जिसकी duty इसे रोकने की है |

 Section 151 in The Code Of Criminal Procedure, 1973

  (1)एक पुलिस ऑफिसर जो ये विस्वास कर की किसी व्यक्ति ने ऐसा कोई कार्य (समाज में शांति भंग करने का) किया है तो उस व्यक्ति को बिना magistrate के ऑर्डर के बिना वारंट के उसी वक्त गिरफ्तार कर सकता है |

(2)  इस धारा के अंतर्गत गिरफ्तार हुए व्यक्ति को पुलिस ऑफिसर 24 घंटे से ज्यादा अपने पास नही रखेगा | तथा गिरफ्तार व्यक्ति को authorized person यानि एरिया मजिस्ट्रेट या कोई और अधिकारी (special executive magistrate (S.E.M.) के सामने पेश करेगा|

 

kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. के अपराध का प्रकार :-

इस प्रकार के अपराध में (1) व्यक्तियो का आपस में सडक पर लड़ना जिससे की और नागरिको को परेशानी हो (2) व्यक्ति का सडक पर या अपने निवास पर जोर से चिल्लाना या गाली देना जिससे की और नागरिको को परेशानी हो (3) ऐसे कपड़े पहनना जिससे की किसी और साधारण नागरिक को या समाज को असुविधा हो (4) किसी नारी को इस प्रकार के इशारे करना या हरकत करना जिससे की वह असुविधा महसूस करे | (5) चुनाव के समय लागु कानून आचार-सहिता में किसी भी प्रकार की रोक टोक उत्पन्न करना या उस आचार-सहिता को छति पहुचाना या पहुचाने की कोशिश करना | (6) किसी अन्य लागु कानून को लागु होने से रोकना या उसकी आचार-सहिता को छति पहचाना (7) किसी प्रकार का बल या वस्तु का उपयोग करके सरकारी सम्पत्ति को नुकशान पहचाना (8) कोई वस्तु का प्रयोग करके सरकारी सडक जो की नागरिको के उपयोग के लिए है उस में कोई व्यधान उत्पन्न करना या कोई वस्तु उस पर डालना उसे इसमे शामिल है|

kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. में पुलिस का रोल :-

इस प्रकार के मामले में पुलिस का रोल यह है की वह अपराध की श्रेणी के हिसाब से धारा लगा कर केस बनाती है अगर पुलिस के अनुसार अपराध साधारण श्रेणी का है तो वह section  107/150 C.R.PC. लगा देगी|  और दोनों आरोपियों के खिलाफ केस बना कर कोर्ट में फ़ाइल् कर देती है तथा उन्हें वहा से नोटिस आता है और उनका केस चलता है | तथा अगर पुलिस को केस असाधारण  श्रेणी का लगता है की अगर इन व्यक्तियों को गिरफ्तार नही किया तो ये अपराध नही रुकेगा तो ऐसे में पुलिस आरोपियों पर section 107/151 C.R.PC. लगाती है तो ऐसे में पुलिस आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार करके कोर्ट के सामने पेश करती है तथा वह उनका केस चलता है |

kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. में जमानत या बेल :-

जैसा की उपर बताया है की section 107/150 C.R.PC. में व्यक्ति अरेस्ट नही होता है पर उसे भी बैल कोर्ट के नोटिस आने के बाद कोर्ट में जाकर लेनी होती है | पर section 107/151 C.R.PC. में आरोपी गिरफ्तार होता है तो ऐसे में उसको कोर्ट से जमानत लेनी होती है इस धारा का केस bailable offence में आता है इसमे कोर्ट से बैल उसी वक्त मिल जाती या दुसरे शब्दों में कहे की कोर्ट को जमानत देनी ही होती है| तो अगर आरोपी के पास कोई जमानती नही भी है तो भी कोर्ट आपको personal bail bond पर भी छोड़ सकती है लेकिन ऐसा करना कोर्ट की अपनी मर्जी होगी |

केस किस जज या कोर्ट में चलता है :-

ये केस बाकि केसों की तरह नही होता है जो की प्रॉपर कोर्ट में चले ये केस उस डिस्ट्रिक्ट एरिया के ACP साहब के पास चलता है जो की वीमेन सेल के इन्चार्गे भी होते है | जब वे केस की सुनवाई करते है तो वे SEM कहलाते है यानी की “स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट”  |

ये पॉवर उनको स्टेट देती है | उनका जुडीसीरी से कोई मतलब नही होता है वे उनके अंडर में भी काम नही करते है सिर्फ इसी प्रकार के केस देखते है |

kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. में केस की समय सीमा :-

ये केस नॉर्मली 6 महीने ही चलते है तथा बाद में आरोपी को एक पीस बांड लेकर छोड़ दिया जाता है पर अगर कोर्ट चाहे तो इन केसो को अपने पास एक साल के लिए रख सकती है | पर एक साल के बाद कोई भी कोर्ट किसी भी आरोपी को अपनी कोर्ट में पेश होने के लिए बाउंड नही कर सकती है | एक साल के बाद आरोपी अपने आप बरी है | अगर कोई कोर्ट आपको परेशान करती है तो आप उसकी शिकायत अपने D.C.P. या C.P. साहब या district judge या हाई कोर्ट से कर सकते है |

kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. में सजा :-

वैसे तो कोर्ट चाहे तो अपराध सिद्ध होने पर आरोपी को एक साल तक की सजा  सुना सकती है | पर मैंने तो आज तक किसी को इन केसों में सजा होते नही देखा है| इसलिए कोई judgment यहा नही दे रहा हु | (लेकिन इसका मतलब ये नही है की आप लोग मेरी इस बात को गलत तरीके से ले) |

kalandra notice section 107/150/151 cr.p.c. में बिना केस लडे बरी होना :-

इस बात को किसी को भी नही पता है में आप लोगो बता रहा हु की अगर आप आरोपी कोर्ट में अपना केस नही चलाना चाहता है या कोर्ट से बिना केस लडे बरी होना चाहता है तो वह कोर्ट में पहली ही तारीख पर अपना peace bond धारा 117 CR.P.C. के तहत दे कर इस कानूनी कार्यवाही से बच सकता है इस bond में ये लिखा होता है की में आज के बाद ऐसा कोई भी कार्य नही करूंगा जिससे की समाज की शांति भंग हो या किसी नागरिक को कोई परेशानी हो या किसी भी सरकारी सम्पति को नुकशान पहुचे और अगर ऐसा एक साल के अंदर होता है तो में इस अपराध का दोषी माना जा सकता हु | ऐसा कर के आप इस लम्बी क़ानूनी कार्यवाही से बच सकते हो| पर ये ध्यान रहे की अगले एक साल तक आप पर कोई ऐसा शांति भंग का आरोप नही लगे | इसका बांड का नुक्सान ये होता है की सामने वाली विरोधी पार्टी आप पर कोई भी झूठा आरोप लगा कर दुबारा केस स्टार्ट करवा सकती है | इसलिए अगर विरोधी पार्टी भी बांड दे तो आपको देना चाहिए वरना इससे बचे |

इसके अलवा भी अगर आप धारा 117 CR.P.C. के तहत बांड नही देना चाहते है तो आप कोर्ट के सामने अंडरटेकिंग दे सकते है इसमें आप पर कोई क़ानूनी कार्यवाही नही होगी और न ही विरोधी पार्टी इसका कोई लीगल फायदा उठा पायेगी |

अन्य बाते :-

अगर प्रशासन या पुलिस को ऐसा लगता है की अमुख आदमी देशद्रोह जैसा उपद्रव कर सकता है या सामिल हो सकता है तो उसे भी इसी प्रकार का नोटिस दिया जाता है !हा यहाँ केवल इसकी धारा बदल जाती है ! यहाँ उसकी धरा 108 होती है| धारा 116 के अनुसार मजिस्ट्रेट उपरोक्त शांति भंग होने के सूचना की सच्चाई जानने की जाँच कर सकता है |

जयहिंद

WRITTEN BY

ADVOCATE DHEERAJ KUMAR

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