उपभोक्ता कानून consumer protection act व छतिपूर्ति

प्रशन :- वकील साहब उपभोक्ता कानून consumer protection act कया होता है? हमे कैसे शिकायत करनी चाहिए ग्राहक कैसे केस फाइल करे ? क्या  पीड़ित को छतिपूर्ति और दोषी को सजा मिलती है ?

उत्तर:-

WHAT IS उपभोक्ता कानून consumer protection act 1986 कया है  :-  उपभोक्ता कानून संरक्षण अधिनियम 24 दिसंबर 1986 को परिवर्तन में आया था  तथा यह  उपभोकता कि विक्रेता के खिलाफ़ शिकायतो के निवारन करने के लिये बनाया गया है |

कन्जूमर कौन है WHO IS CONSUMER:-  उपभोक्ता फोरम  संरक्षण अधिनियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो कोई वस्तु या सेवा उपयोग  या  उपभोग के लिए खरीदा है वह कंजूमर  है |

उपभोक्ता कानून consumer protection act

उपभोक्ता कानून consumer protection act

What is consumer complainant  उपभोक्ता शिकायत क्या है :-  जब कोई विक्रेता कोई वस्तु या सेवा बेचता है या उसे  गलत जानकारी के साथ बेचता  है  या छपी हुई वस्तु के मूल्य से ज्यादा मूल्य लेता है और वह वस्तु या  सेवा उस जानकारी के अनुसार खरी नहीं उतरती है तो उसे खरीदने वाला उपभोक्ता यानि कंजूमर होता है वह इस अधिनियम के अनुसार अपनी शिकायत कर सकता है |

ऐसी शिकायत में वह अपनी वस्तु को बदल  कर  ले सकता है  या  उस वस्तु  का मूल्य  जुरमाने सहित  विक्रेता से ले सकता है  इस कानून के अंतर्गत सभी प्रकार की सेवा जो कि एक ग्राहक पैसा  देकर खरीदता है वह आती है चाहे वह सरकारी हो या गैरसरकारी जैसे अगर हम रेलवे या किसी विमान में सफर कर रहे हो तो वह सेवा भी इस अधिनियम  के अंतर्गत आती है कोई भी टेलीफोन सेवा या किसी दुकानदार से कोई सामान खरीदना या पैसे के बदले में किसी प्रकार की कोई सर्विस लेना वह सब इस कानून और अधिनियम के अंतर्गत आता है

 

शिकायत कैसे करें और कहा करे :-  हम उपभोक्ता कानून consumer protection act अधिनियम  की धारा  12 के तहत शिकायत कर सकते है | शिकायत के लिए जरूरी बाते निम्नलिखित है |

#  एक सादे कागज पर शिकायत लिखी जा सकती है जिस मे उपभोकता अधिनियम का पता भी लिखा हो |

#  शिकायतकर्ता व  विरोधी पार्टियों का नाम,  विवरण  और पता

#  शिकायत से संबंधित तथ्य यह कब कहा उठी और उसका निवारन कयो नही हुआ व उसका कारन |

#  शिकायत व आरोपों के समर्थन में दस्तावेज

#  शिकायतकर्ता द्वारा मांगी जा रही राहत जुरमाने सहित लिखी हो

#  शिकायतकर्ता  या उसके पावर टोनी अधिकृत एजेंट के हस्ताक्षर इसके साथ एक एफिडेविट जिसमें यह लिखा हो कि सब तथ्य सत्य है

# और  न्यायालय शुल्क  उस राज्य  के अनुसार  |

केस डालने  कि अवधि व समय सीमा :-  उपभोक्ता कानून consumer protection act अधिनियम कि धारा 24 A के अनुसार शिकायतकर्ता  को केस 2 साल के अनदर फ़इल कर देना चाहिये | वैसे इसके बाद भी केस देरी के कारन के साथ फ़इल हो सकता है |

Where should file complaint शिकायत कहां करें :-  आप 20  लाख  रुपए से कम  मूल्य की वस्तु के लिए आप डिस्टिक  जिला फोरम में शिकायत कर सकते हैं और 2० लाख रुपए से अधिक किंतु एक करोड रुपए से कम वस्तु के लिए आप राज्य आयोग स्टेट कमीशन में शिकायत कर सकते हैं और एक करोड रुपए के मूल्य से अधिक के लिए आप राष्ट्रीय आयोग में शिकायत कर सकते हैं

शिकायत कैसे कहां करें :-  आप सवयं  या अपने वकील द्वारा जिला,  राज्य या नेशनल कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकते हैं यह  शिकायत  उपभोक्ता कानून consumer protection act की धारा / सेक्शन 12 के अंतर्गत दी जाएगी |

केस कि अवधि :-  शिकायत कितने दिन में निपट सकती है शिकायत का निपटान व समयावधि उपभोक्ता कानून consumer protection act की धारा 13 ( 3)  ए के अनुसार उपभोक्ता का केस दोषी को notice मिलने के बाद कम से कम 3 महिने व जयादा से जयादा  5 महीने के अंदर निपट जाना चाहिए लेकिन जैसा कि आप जानते हैं ऐसा नहीं होता है क्योंकि कोर्ट में काफी सारे केस पेंडिंग होते हैं तथा कोर्ट  की कार्य श्रेणी इस प्रकार की है कि इसमें 1 से 3 साल तक लग जाते हैं |  लेकिन फिर भी आप इस धारा के अंतर्गत कोर्ट में एप्लीकेशन लगा कर अपना केस जल्दी निपटाने के लिए एप्लीकेशन लगा सकते हैं | और कोर्ट पर दबाव बना सकते है |

केस मे छतिपूर्ति और सजा :- उपभोक्ता कानून consumer protection act अधिनियम कि धारा 27  के अनुसार अदालत दोषियो को 1 महिने से लेकर 3 साल तक कि सजा सुना सकती है तथा 2 हजार से लेकर 20,000/- तक का जुरमान भी लगा सकती है  तथा अपनी special power को इसतेमाल कर जुरमाना जयादा भी कर सकती है | और धारा 25 के तहत दोषियो कि चल व अचल समपति को जबत भी कर सकती है |

 

प्रशन :- वकील साहब क्या डॉक्टर पर उपभोक्ता कानून consumer protection act लागु होता है? डॉक्टर के खिलाफ कैसे शिकायत करनी चाहिए ? क्या डॉक्टर्स को punishment और पीड़ित को छतिपूर्ति मिलती है ?

उत्तर :- डॉक्टर हो या हॉस्पिटल सभी पर उउपभोक्ता कानून consumer protection act लागु होता है ! मै आगे आपको बता दू ,डॉक्टर हो या अस्पताल इन सभी पर डेफिशियेंसी इन सर्विस एंड ट्रेड प्रैक्टिस (Deficiency in service and unfair trade practice Act ) का कानून भी लागु होता है और medical Negligence का केस भी बन सकता है ! अगर आप को कानून की समुचित जानकारी हो ? अभी पश्चिमी बंगाल के कोलकता में State consumer Disputes Redressal Commission ने बिरला हाई रिसर्च सैंटर के दो काडिर्यो लोजिस्ट पर 18 लाख जुर्माना किया था  मेरे ही एक केस में अपोलो हॉस्पिटल को 5 लाख का मुआबजा देना पड़ा है ! जस्टिस कालिदास मुखर्जी की अध्यक्षता वाली बैच ने गौरव खन्ना के माता – पिता को 18 लाख रु मुआवजा देने का फैसला सुनाया गया था क्योकि सन 2005 में डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की मौत हो गयी थी !

एक और केस में पिछले साल  भी कमिशन ने डॉक्टर की लापरवाही के लिए पेशेंट को एक करोड़ तिहत्तर लाख (1.73 करोड़) रु. देने का निर्णय सुनाया था ! आज हॉस्पिटल में इलाज कम दुकान ज्यादा खुल गए है और पैसे के उगाही का ज़रिया भी बन गया है ! आप शिकायत करे कोर्ट द्धारा॑ Authorized डॉक्टर पर केस बनेगा और डॉक्टर द्धारा॑ मरीज को मुआवजा देना पड़ेगा और अगर नहीं देगा तो जेल भी जाना पड़ेगा!

# वैसे आप लोग डॉक्टर के बारे में मेडिकल कोंसिल को भी कंप्लेंट कर सकते हो | और डॉक्टर का lisence कैंसिल करवा सकते हो |

# उपभोग्ता क़ानून के अलावा आप I.P.C. में भी इसके लिए provission है | (इस पर फिर कभी विस्तार से लिखूंगा )

# वैसे सबसे अच्छा तरीका सीधा हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में में रिट लगा कर भी आप लोग इन्हे सजा करवा सकते है व compansssion ले सकते है

(साथियों पाठक के प्रश्नों को उन्ही के लाइन में लिखकर आप सभी को उत्तर दिया करता हूँ ताकि समाज के अंतिम ब्यक्ति तक निशुल्क कानून की जानकारी मिल सकें ! ये मेरा प्रयास और आपका सहयोग है !)

कॉन्क्लूज़न:-   अगर किसी  के साथ किसी प्रकार की भी धोखाधड़ी होती है तो उसे उपभोक्ता कानून consumer protection act के तहत  फॉर्म में जाना चाहिए उसके लिए चुप ना बैठ कर इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए | वैसे आप खाने पिने के समान के बारे  मे उपभोकता कानून के अलावा और भी कानुन और गवर्नमेंट डिपार्टमेंट है जहा आप कंप्लेंट कर सकते हैं जैसे कि food supplies and consumer affairs department etc. मैंने Pepsi कंपनी पर केस किया था जो कि मेरे एक दोस्त द्वारा डाला गया था उसका केस शेख सराय उपभोकता अदालत दिल्ली में चला था जिसमें मैंने 18 लाख  का केस फाइल किया था उसको 15  लाख रुपए मिले थे यह काफी समय पहले की बात तकरीबन 12 साल पहले की बात है |

जयहिंद

द्वारा

अधिवक्ता धीरज गौतम

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